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नये भवन के लिए नहीं मिल रहीं जमीन,पुराने भवन की छत से गिरता हैं प्लास्टर
नये भवन के लिए नहीं मिल रहीं जमीन,पुराने भवन की छत से गिरता हैं प्लास्टर…
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन हुआ जर्जर

गोरखपुर-करंजिया विखं के अंतर्गत कस्बा गोरखपुर का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हादसों को निमंत्रण दें रहा हैं दरअसल वर्तमान में भवन की स्थिति काफी जर्जर हैं सीमेंट छोड़ने व हर समय प्लास्टर गिरने पर हादसा होने का डर चिकित्सा कर्मियों तथा मरीजों को लगा रहता हैं वहीं बरसात में चारों ओर से पानी टपकने पर कामकाज और उपचार को लेकर भी इन्हें परेशान होना पड़ता हैं बावजूद इसके जान की बाजी लगाकर कर्मचारी अपना काम भी कर रहें साथ ही मरीजों की सेवा उपचार भी जानकारी के अनुसार इस भवन का निर्माण हुए एक दशक से अधिक हो रहा हैं और भवन जीर्णोद्धार की स्थिति में नहीं हैं जबकि नये भवन के लिए राशि स्वीकृत हैं परंतु कस्बा के अंदर जमीन नहीं मिलने के कारण निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं किया गया ।
चिकित्साकर्मी व मरीज रहतें चिंतित- भवन की दुर्दशा को देखकर काम के दौरान कर्मचारी भयभीत रहते हैं यही हाल मरीजों का भी हैं मरीज अस्पताल परिसर में प्रवेश करतें ही सबसे पहले छत की ओर देखतें हैं पूरे परिसर में यह स्थिति होने पर उखड़े प्लास्टर के गिरने को लेकर कामकाम व उपचार के दौरान मरीज डरे सहमे रहतें हैं। सबसे अधिक परेशानी का सामना बरसात के दिनों में करना पड़ता हैं जब बारिश होती हैं तो पूरा छत टपकता हैं सर छुपाने की जगह नहीं बचती जर्जर हाल भवन पर सामान्य बारिश पर भी पानी टपकने लगता हैं । छतों से पानी टपकने व भवन के फर्श पर इसके जमा होने पर कामकाज,उपचार को लेकर कर्मचारियों एवं मरीजों को परेशानी उठाना पड़ता हैं। छत टपकने से चिकित्सालय का सामान भी खराब होता हैं। वर्तमान में भवन की हालत ऐसी है कि कब यह पूरी बिल्डिंग गिर जाए कुछ कहा नहीं जा सकता गरीब मरीजों का इलाज भी मौत के साए में होता हैं अस्पताल की हालत देख लगता हैं कि सबकी जान खतरे में हैं मरीज से मिलने आए परिजन सुंदर तेकाम ने बताया कि अस्पताल के भवन की स्थिति बहुत खराब हैं, यहां आने से डर लगता हैं न जाने कब क्या अनहोनी हो जाए. वहीं,स्वंय के शुगर एवं बीपी की जांच कराने पहुंचे बहादुर सिंह परस्ते ने बताया कि जांच वगैरह तो ठीक ठाक किया गया परंतु अस्पताल के बिल्डिंग की दुर्दशा देख उन्हें तो डर लगता हैं, लेकिन गरीब होने के कारण उनके पास कोई दूसरा रास्ता भी नहीं हैं साथ ही मरीजों के दूसरे परिजन ने भी तकरीबन ऐसी ही बात बताई ।
डिलीवरी रूम की हालत खराब – महिला कर्मचारियों की मानें तो भवन के अंदर सबसे खराब स्थिति डिलीवरी रुम की हैं खासकर बरसात के दिनों में जब किसी प्रसूता की डिलीवरी कराना हो तो संभव ही नहीं हैं कि लेबर रुम में डिलीवरी हो जाए कारण कि इतना टपकता हैं कि रुम के अंदर खड़े नहीं रह सकतें प्लास्टर गिरने की समस्या केवल स्टोर रूम में ही नहीं बल्कि इंजेक्शन रूम में भी हैं। इंजेक्शन रूम के छत से भी प्लास्टर गिर रहा हैं, लेकिन यहां पर काम-काज बंद नहीं किया गया हैं। प्रबंधन के पास अतिरिक्त रूम नहीं होने से खतरा मोल लेकर काम करना पड़ रहा हैं। भवन व छत खस्ताहाल होने से किसी भी समय प्लास्टर गिरने की खतरा बना हुआ हैं।गत वर्ष तो तिरपाल डालकर काम चलाया गया था इस वर्ष कैसी व्यवस्था की जाएगी अभी तक कुछ पता नहीं हैं जबकि बारिश के दिन करीब आ गए हैं नये भवन के लिए जमीन नहीं मिल रही – अस्पताल प्रबंधन के राकेश बैरागी ने बताया कि नये भवन निर्माण के लिए राशि स्वीकृत हैं श्मशान घाट के पास खाली पड़ी जमीन को नवीन भवन का निर्माण करने के लिए उपयुक्त मानकर जगह को चिन्हांकित किया गया था ठेकेदार ने प्रारंभिक तौर पर कुछ काम भी करवाया और अपने रहने के लिए आवासटोला में एक कक्ष का निर्माण कराकर उक्त जमीन पर प्रारंभिक तौर पर समतलीकरण जैसा कुछ काम कराया भी हैं लेकिन बाद में काम को रोक दिया गया ठेकेदार के बताएं मुताबिक दलदल जमीन मिलने के कारण उस स्थान पर भवन का निर्माण संभव नहीं हैं इसलिए उतने में ही काम रोकना पड़ रहा हैं कहकर ठेकेदार वापस चला गया अब चूंकि भवन निर्माण के लिए कस्बा में जमीन तलाशी जा रही हैं लेकिन अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं हैं और इस संबंध में मुझे फिलहाल किसी तरह की जानकारी नहीं हैं गौरतलब हैं कि गोरखपुर कस्बा आसपास के दर्जनों गांवों का केंद्र बिंदु हैं दस पंचायतों के नागरिकों के अलावा पड़ोसी जिले के बाशिंदे भी कस्बा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उपचार कराने आतें हैं इसके अलावा वनांचल और ग्रामीण क्षेत्र भी अपनी बिमारियों के इलाज के लिए यहां आश्रित हैं ऐसे स्थिति में इस स्वास्थ्य केंद्र में वो तमाम संसाधन मौजूद रहना चाहिए जिसकी दरकार आम नागरिक को हैं लेकिन अफसोस इसके उल्ट स्थिति हैं अब सरकारी अस्पताल भवन के नये निर्माण के लिए जमीन तलाशी जा रही हैं लेकिन कहीं खाली जगह नहीं मिल रहा जबकि कस्बा के अंदर पर्याप्त सरकारी जमीन हैं जिस पर लोगों ने कब्जा कर रखा हैं अब यह देखना हैं कि प्रशासन अतिक्रमणकारियों से भवन निर्माण के लिए जमीन खाली करवाएंगी या फिर अलग से व्यवस्था किया जाएगा ।


