क्राइमप्रदेश

बड़झड प्राथमिक विद्यालय मैं गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज का हुआ अपमान,बिना अशोक चक्र के ही फहरा दिया ध्वज

  • लोकविचार बिछिया। जिन शिक्षकों पर बच्चों को शिक्षित करने की जिम्मेदारी दी गई है वह खुद ही कितने शिक्षित होंगे अगर यह देखना है तो डिण्डोरी जिले के बड़झर विद्यालय में देखा जा सकता है जहां के शिक्षको को यह भी ज्ञान नही है कि हमारा राष्ट्रीय ध्वज कैसा होता है, एक ओर हमारा देश आन बान और शान से देश के 72 गणतंत्र का पर्व मना रहा है राजपथ पर देश का शौर्य प्रदर्शित किया गया गांव गांव गली मोहल्ले में पूरे वैभव के साथ गौरवशाली परम्परा का निर्वहन किया गया वहीं इस विद्यालय के शिक्षकों को अपने राष्ट्रीय ध्वज का ही ज्ञान नही है और अधूरे ध्वज को फहराकर ओपचारिकता निभा ली इस विद्यालय में जो ध्वज फहराया गया उसमे अशोक चक्र गायब है। किसी की भी नजर इस ओर नही गई और ध्वज फहराकर शिक्षक अपने घर चले गए, जिसने भी यह ध्वज देखा चकित रह गया कि इस तरह की चूक आखिर कैसे हो गई। अब जिम्मेदारों की समझ पर क्या कहा जाए। हिन्दू सेवा परिषद के प्रदेश महासचिव धर्मेंद्र सिंह ठाकुर की नजर इस ध्वज पर पड़ी और उन्होंने तस्वीरें साझा करते हुए जानकारी दी

शिक्षक ने नही दिया ध्यान

प्राथमिक शाला बड़झर के प्रधान अध्यापक भागचंद से इस विषय मे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि झंडा उन्होंने फहराया है लेकिन उसे अन्य शिक्षक ने बांधा था, पहले से ही यही झंडा फहराया जाता रहा है और ध्वजारोहण के बाद प्रधानपाठक व शिक्षक अपने घरों में चले गए।

अपमान पर है सजा का प्रावधान हालांकि ध्वज संहिता पर गौर करें तो ध्वज फहराने के दौरान उसकी गरिमा का विशेष ध्यान रखना चाहिये ऐसी कोई भी हरकत न हो जिससे ध्वज का अपमान हो। हालांकि यहाँ पर ध्वज का अपमान उसके स्वरूप में परिवर्तन से हुआ है ।झंडे के अपमान पर नेशनल ऑनर एक्ट 1971 (2003 में संशोधित) में झंडे को जमीन पर रखने जैसे कई अनादरों पर सजा का प्रावधान है। पहले अपराध पर 3 साल तक की जेल की सजा और जुर्माना देना पड़ेगा। इसके बाद अपराधों में कम से कम एक वर्ष के लिए जेल कारावास से दंडित किया जाएगा

तहसीलदार ने दिया कार्रवाई का आश्वासन

पूरे मामले की जानकारी तहसीलदार शहपुरा श्री धुर्वे ने कार्रवाई का भरोसा दिया और बुधवार को बड़झर में फहराए गए गलत ध्वज पर जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया

इनका कहना है
मैं मां नर्मदा के दर्शन हेतु कुटरई जा रहा था. जहां मुझे बिना अशोक चक्र के तिरंगा फहरता दिखा. शिक्षकों के कंधों पर देश का भविष्य होता है और यदि उन्हीं के द्वारा इस तरह ध्वज संहिता का उल्लंघन किया जायेगा तो फिर विद्यार्थी इनसे क्या शिक्षा लेंगे यह चिंतनीय विषय है. जिला प्रशासन को दोषियों के विरुध्द कठोरतम कार्यवाही करना चाहिये
.।धर्मेंद्र सिंह ठाकुर,प्रदेश महासचिव,हिंदू सेवा परिषद् मध्यप्रदेश

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