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शासकीय विभागों में कार्यरत ठेका एवं आउटसोर्स पर कार्यरत श्रमिकों/ कर्मचारियों को विभिन्न श्रम अधिनियमों के प्रावधानों का लाभ देने दिशा निर्देश जारी

डिंडोरी। कलेक्टर विकास मिश्रा ने शासकीय विभागों में कार्यरत ठेका एवं आउटसोर्स पर कार्यरत श्रमिकों/कर्मचारियों को विभिन्न श्रम अधिनियमों के प्रावधानों का लाभ देने के संबंध में दिशा निर्देश जारी किए हैं। श्रम पदाधिकारी डिंडोरी ने बताया कि जारी निर्देशानुसार वर्तमान में शासकीय विभागों, उपक्रमों तथा निमग और मंडलों में विभिन्न कार्यों हेतु जैसे सफाईकर्मी (हाउस कीपिंग), कम्प्यूटर ऑपरेटर, डाटा एंट्री ऑपरेटर चौकीदार, ड्रायवर निर्माण सुरक्षाकर्मी आदि के रूप में ठेका एवं आउटसोर्स पर श्रमिकों/कर्मचारियों की नियोजित किया जाता है परन्तु ऐसे ठेका एवं आउटसोर्स पर कार्यरत श्रमिकों/कर्मचारियों को विभिन्न श्रम कानूनों के प्रावधानों का लाभ प्राप्त नहीं हो रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि जिन ठेकेदारों और एजेंसियों के माध्यम से इन श्रमिको/कर्मचारियों को नियोजित किया जाता है उस विभाग द्वारा उन ठेकेदारों का पंजीयन लाईसेंस ठेका श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1970 के अंतर्गत प्राप्त करने हेतु प्रावधान का परिपालन नहीं कराया जाता है। इस अधिनियम में पंजीयन लाईसेस प्राप्त करने पर संबंधित ठेकेदार की जानकारी श्रम विभाग को होने से विभिन्न श्रम कानूनों के प्रावधानों का परिपालन कराया जाना संभव हो जाता है। उक्त संबंध में विभिन्न श्रम अधिनियमों में प्रावधानों का परिपालन संबंधित नियोजक ठेकेदार द्वारा किया जाना आवश्यक है। जिसमें ठेका श्रम (प्रतिशेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1970 अधिनियम के अनुसार 20 या 20 से अधिक ठेका श्रमिकों के नियोजन पर संबंधित विभाग/ उपक्रम/निगम/मण्डल को अधिनियम में प्रमुख नियोजक के रूप में पंजीयन एवं ठेकेदार को लाइसेंस श्रम विभाग से लेना अनिवार्य है। पंजीयन/लाइसेंस संबंधी संपूर्ण प्रक्रिया तथा प्रपत्र आदि की जानकारी श्रम विभागीय पोर्टल www.shramsewa.mp.gov.in पर दर्शित है। ठेका एवं आउटसोर्स पर कार्यरत श्रमिको/कर्मचारियों को ठेका श्रम (प्रतिशेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1970, भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार (नियोजन का विनियमन एवं सेवा शा अधिनियम, 1986, न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948, वेतन भुगतान अधिनियम, 1936, एवं बोनस भुगतान अधिनियम, 1965 आदि में वर्णित प्रावधानों का लाभ मिलना कानूनी रूप से अनिवार्य है। इन श्रमिको कर्मचारियों को शासन द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी, नियत समय पर वेतन का भुगतान, यदि ओवरटाइम कार्य किया गया है तो ओवरटाइम का भुगतान, बोनस राशि का भुगतान पी एफ राशि तथा ई.एस आई सी के अंशदान का भुगतान करते हुये इन योजनाओं का लाभ तथा ग्रेच्युटी साप्ताहिक अवकाश आदि अन्य वैधानिक सुविधायें प्राप्त होना आवश्यक है। वर्तमान में न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948, के अंतर्गत 01 अक्टूबर 2023 से 31 मार्च 2024 तक मजदूरी की दरे निर्धारित की गई है। निर्धारित दर अनुसार अकुशल श्रमिक का दैनिक वेतन 378 रूपए एवं मासिक वेतन 9825 रूपए है। इसी प्रकार से अर्धकुशल श्रमिक का दैनिक वेतन 411 रूपए एवं मासिक वेतन 10682 रूपए, कुशल श्रमिक का दैनिक वेतन 464 रूपए एवं मासिक वेतन 12060 रूपए और उच्चकुशल श्रमिक का दैनिक वेतन 514 रूपए एवं मासिक वेतन 13360 रूपए निर्धारित है।

अतः समस्त विभागों एवं शासकीय उपक्रमों, निगमों व मंडलों में आउटसोर्स एवं ठेके पर कार्यरत कर्मचारियों को विभिन्न श्रम कानूनों का लाभ दिलाये जाने हेतु प्रमुख नियोजक के रूप में संबंधित विभाग, उपक्रमों, निगमों व मंडलों या उनके स्थानीय सक्षम अधिकारी द्वारा तत्काल पंजीयन (Registration) प्राप्त करने की कार्यवाही की जाय तथा ठेकेदार/आउटसोर्स एजेंसी को अनुज्ञप्ति (Licence) प्राप्त करने के निर्देश जारी करें एवं यह सुनिश्चित करें कि मजदूरों को नियत समय पर पात्रतानुसार निर्धारित न्यूनतम मजदूरी का भुगतान, बोनस राशि का भुगतान, ओवर टाइम का भुगतान एवं कर्मचारी भविष्य निधि, राज्य बीमा का अंशदान जमा हो व ग्रेच्यूटी एवं अवकाश आदि समस्त सुविधायें नियमानुसार प्राप्त हों। इस आशय से समस्त कार्यालय प्रमुख/विभाग प्रमुख शासकीय उपक्रम जिला डिण्डौरी को निर्देशित किया जाता है कि उपर्युक्त समस्त प्रावधानों को सही रूप से लागू करने हेतु जिले में श्रम अधिकारी, नोडल अधिकारी के द्वारा सभी विभागों के इस मद के देयकों के परीक्षण उपरांत ही ठेकेदार अथवा आउटसोर्स एजेंसियों के देयकों का भुगतान कोषालय द्वारा किया जाए।

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