कस्बा में कोरोना कर्फ्यू का व्यापक असर, सूने पड़े गली सड़क

गोरखपुर से अख़लाक़ कुरेशी

करंजिया विखं के अंतर्गत कस्बा गोरखपुर में बुधवार रात आठ बजे से शुरू हुए कोरोना कर्फ्यू का व्यापक असर गुरुवार को नजर आया । दिनभर चारों तरफ सन्नाटा छाया रहा आज कोरोना कर्फ्यू ने एक बार फिर पिछले साल अप्रैल माह के लाॅकडाउन के दिनों को ताजा कर दिया आमजन दिन भर पिछले साल के अनुभव के बारे में चर्चारत रहें ।बता दें कि वर्तमान में कोरोना वायरस से बनी संकट की स्थिति और संक्रमण के फैलाव की रोकथाम के लिए यह एहतियाती कदम उठाया गया हैं इस अवधि में 14अप्रैल की रात्रि से 20अप्रैल के बीच का समय कोरोना कर्फ्यू यह हम सभी के लिए और आपके परिवार कस्बा और शहरीआंचल से लेकर पूरे देश के लिए बेहद अहम हैं। जबकि इस दौरान आपके संयम का परिचय महामारी के चक्र को तोड़ने में सहायक हो सकता हैं।इसी चक्कर में कस्बा के आसपास के गांवों से लेकर दूर दराज के गांव तक सन्नाटा पसरा रहा आम दिनों की तरह न तो आवागमन के साधन दिखें और न ही पैदल चलने वाले नजर आए गौरतलब हैं कि पिछले वर्ष की तुलना इस वर्ष फैले संक्रमण के बाद महामारी ने आम लोगों को भयभीत किया हैं लोग खुद को घरों तक सीमित रखकर दिन बिताना उचित मान रहें हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी असर -
कस्बा के श्याम सुंदर ने बताया कि कोरोना कर्फ्यू की शुरुआत से वो अपने परिजनों के साथ घर पर ही रहेंगे और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों से भी आग्रह करेंगे कि अनावश्यक घरों से बाहर न जाएं जबकिगुरुवार को कस्बा के बाजार में बहुत से ऐसे लोग भी दिखें जो गाइडलाइन का खुला उल्लंघन कर रहें थे इन्होंने न तो मास्क लगाया था और न ही संपर्क दूरी इन्हें देखने के बाद यह लगा कि वे गंभीर नहीं हैं और उन्हें लग रहा है कि कुछ नहीं हैं. जबकि ऐसी ही लापरवाही के कारण कोरोना वायरस आज पूरी दुनिया को अपनी गिरफ़्त में ले चुका हैं । स्थानीय लोगों ने मांग की हैं कि जो भी व्यक्ति इस प्रकार की असावधानी करते पाया जाएं तो उस पर कठोर और दंडात्मक कार्रवाई होना चाहिए दीपक तेकाम ने बताया कि गुरुवार के दिन ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसा महसूस हुआ जैसे पुनः लाॅकडाउन लगा दिया हो जैसे चारों तरफ सूनसान किसी तरह का शोर शराबा नहीं था ऐसे माहौल से पिछले साल के अप्रैल माह का स्मरण हो गया उसका कहना था कि अब ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी कोरोना को लेकर बहुत सजग हो गए हैं और कोरोना कर्फ्यू को गंभीरता से ले रहे हैं.
उनका कहना है कि ग्रामीण पहले कोरोना वायरस के खतरे को हल्के में ले रहे थे मगर अब वे चिंतित हैं. गुरुवार को मैंने अपने कुछ दोस्तों को गांव में हैंड सैनिटाइज़र के साथ देखा. ये वही दोस्त हैं जो कभी किसी बात को लेकर गंभीर नहीं रहते. अब तो ये आलम हैं कि जो भी मिलता हैं कोरोना की चर्चा अवश्य करता हैं
अपनी भागीदारी भी तय करें – वर्तमान में कोरोना की लहर के बाद उपजे हालात की खबर ने सभी वर्ग को चिंतित किया हैं । आमजन भी अब जानने लगें कि थोड़ी सी लापरवाही किसी भी हद तक पहुंचा सकतीं हैं इसलिए शासन प्रशासन ने कोविड 19 के लिए जो प्रोटोकॉल बनाया हैं पूरे मन से उसका पालन करें खासकर ऐसे समय में जब संक्रमण तेजी से फैल रहा हैं तब इसलिए आम नागरिकों की भागीदारी बन जाती हैं कि वे भी शासन प्रशासन के बनाए गए नियमों का कड़ाई से पालन करें और जो भी बातें सामने आती हैं उसका परिपालन करें क्योंकि अब लापरवाही करने का समय नहीं अब समय हैं सुरक्षित बचने कि आप सुरक्षित तो आपका घर परिवार सुरक्षित ऐसी सोच बनाकर हमें भी भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता हैं ।कोरोना संक्रमण का चैन तभी टूटेगा जब हम कोविड 19 के प्रोटोकॉल का ईमानदारी से पालन करेंगे वरना संक्रमण के चपेट में आने से कोई नहीं रोक पाएगा इसके लिए जरूरी हैं कि जो जिस क्षेत्र का नेतृत्व करता हैं वो उस क्षेत्र के समस्त लोगों की इस संबंध में भागीदारी देकर अपने-अपने कर्तव्य का निर्वाहन करवाएं ।और यह भी बताएं कि मास्क का निरंतर उपयोग करना हैं सोशल डिस्टेंस बना रहें और बार-हाथ धोएं एवं समय समय शासन प्रशासन के द्वारा जो सलाह दी जाती हैं उसे मानें ।