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कोरोना संकट के बीच समनापुर में गहरा रहा जल संकट,स्कूल कालौनी में ग्रामीण निजी बोर संचालकों से खरीदकर पी रहे पानी

भू-जल स्तर गिरने से अधिकांश हैंडपम्पों ने तोड़ा दम,. देखरेख के अभाव में नलजल योजना बंद पड़ी है

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पप्पू पड़वार समनापुर
– इन दिनों ग्रामीण दोहरे संकट से घिरे हुए हैं। एक तरफ जहां कोरोना संक्रमण का संकट खड़ा है तो वहीं गर्मी बढऩे के साथ ही पेयजल संकट भी विकराल होता जा रहा है। इस समस्या के गंभीर होने की वजह प्रशासनिक व पंचायत स्तर पर बरती जा रही लापरवाही सामने आई है। जिसके कारण गांव वाले गंभीर पेयजल संकट के साथ-साथ आर्थिक परेशानी से भी घिरे हुए हैं। इस समय जहां पूरा प्रशासन कोरोना की रोकथाम में जुटा हुआ है। इस बीमारी के प्रभाव को कम करने के लिए डाॅक्टर नियमित तौर पर स्वच्छता बनाए रखने के लिए कह रहे हैं। हर किसी का जोर मास्क पहनने, घर के अंदर रहने और हाथ धोने पर है। हाथों को भी पांच चरणों में धोने की जनता से लगातार अपील की जा रही है। कहा जा रहा है सेनिटाइजर का उपयोग करें और हाथों को कम से कम बीस सेंकड तक धोएं। मीडिया के विभिन्न माध्यमों में विज्ञापन से लोगों को इस बारे में जागरुक भी किया जा रहा है। हांलाकि ये प्रयास स्वागतयोग्य है, लेकिन पानी की व्यवस्था नही है तो कैसे साकार हो यह कार्य ।
कोरोनाकाल में जल संकट का ताजा मामला जनपद मुख्यालय समनापुर का सामने आया है। जहां शासन ने कई साल पहले लाखों रुपए की लागत से नलजल योजना मंजूर कर दी। जिसका निर्माण भी हुआ लेकिन देखरेख के अभाव में अब इसका लाभ जनता को नहीं मिल पा रहा है । जगह जगह पाईप लाईन में लीकेज है एवं वाल्ब खराब होने के चलते पानी की टंकी को भरा नहीं जा सकता। शुरूआती दौर में ग्रामीणों ने अपनी समस्या से पंचायत स्तर से लेकर तहसील व जिला स्तर के अधिकारियों को अगवत कराया। लेकिन किसी ने भी ग्रामीणों की इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया और न ही कोई वैकल्पिक इंतजाम किए गए। यही कारण है कि लगातार समस्या से परेशान होकर अधिकांश ग्रामीणों ने निजी बोर संचालकों से कनेक्शन ले लिए। जिसका उन्हें हर माह 500 से 800 रुपए तक शुल्क देना पड़ रहा है। ऐसे में वे ग्रामीण ज्यादा परेशान हो रहे हैं जो यह शुल्क देने में समक्ष नहीं हैं। वे प्रतिदिन दूर सफर तय कर पानी ढोकर लाने को मजबूर बने हुए हैं।
यहां बता दें कि जनपद मुख्यालय समनापुर के अधिकांश लोग बीते काफी समय से पानी खरीदकर पीने को मजबूर हैं। यह स्थिति तब है जब समनापुर में पेयजल के लिए दर्जनों बोरवेल पूर्व से लगे हुए हैं। लेकिन अधिकतर बंद हैं या फिर जलस्तर गिरने से पाइप की कमी के चलते पानी देना बंद कर दिया है।
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक समनापुर में एक दर्जन शासकीय बोरवेल में से 2 से 3 ही चालू की स्थिति में है। ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी का सामना मजदूर वर्ग को करना पड़ रहा है। पेयजल व्यवस्था के लिए उन्हें घंटों इंतजार कर पानी भरना पड़ रहा है।ग्रामीणों का कहना था कि जिले की हर पंचायत में पीने की पानी की समुचित व्यवस्था बनाई गई। लेकिन इस जनपद मुख्यालय समनापुर में पेयजल की स्थिति खराब है। गर्मी और तेज धूप में भी लोग पानी भरने को मजबूर हैं। कई परिवारों के सदस्य दिन एवं रात पानी की व्यवस्था करने में लगे रहते हैं। समनापुर के बजरंग कालौनी के हैंडपम्प पर लंबी-लंबी लाइनें लगी रहती है। जहां करीब एक दर्जन कोरोना संक्रमित होम क्वारंटाइन हैं और वे भी पानी के लिए घर से निकलने को मजबूर हैं। अगर समय रहते पानी की व्यवस्था नही की गई तो पूरे कालौनी को कोरोना संक्रमण से नहीं बचाया जा सकेगा।संक्रमण के बढ़ते प्रभाव को लेकर भी मजबूरी में छोटे-छोटे बच्चों के साथ महिलाओं को पानी के लिए बजरंग कालौनी स्थित हैंडपम्प जाना पड़ता है। जहां पर भीड़भाड़ ज्यादा होने से कोरोना संक्रमण का खतरा भी बना रहता है। छोटे छोटे बच्चें डिब्बे लेकर पानी भरने के लिए निकल जाते हैं। वहीं पानी भरने में करीब 2 घंटे बाद उनका नंबर आता है जिसके बाद उनको पानी मिल पाता है। इस विषय पर ग्राम पंचायत के जवाबदारों से संपर्क साधा जाता है। लेकिन उनके द्वारा कोई पेयजल के लिए संतुष्टि भरा जबाब नहीं दिया जाता है।

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