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संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल से बढ़ी चिंता,मांग मनवाने के लिए कोरोना योद्धाओं ने डाले हथियार

बजाग से अमित साहू की रिपोर्ट
बजाग। कोरोना महामारी ने अब ग्रामीण इलाकों में दस्तक दे दी है और ग्रामीण इलाकों में जांच व उपचार की अधिक आवश्यकता है ऐसे में संविदा स्वास्थ्य कर्मी हड़ताल पर चले गए हैं, कोरोना योद्धा का दर्जा प्राप्त इन कर्मियों ने महायुद्ध के बीच मे ही अपने हथियार किनारे रख दिए हैं, अपने अधिकारों के लिए लड़ना गलत नही है लेकिन ऐसे वक्त में जब देश और समाज की उम्मीदें आपसे हैं और बजाय उम्मीदों पर खरे उतरने के ये योद्धा मैदान में ही हथियार रखकर खड़े हो गए हैं। फिलहाल वक्त अधिकारों के लिए लड़ने का नही बल्कि जीवन बचाने का है।
तहसील मुख्यालय बजाग से इस समय बहुत चिंताजनक खबर आ रही है कि जनपद मुख्यालय बजाग में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बजाग में कार्यरत संविदा स्वास्थ्य कर्मी पूरे प्रांत में हड़ताल पर बैठे हुए हैं। एक ओर जहां कोरोनावायरस पूरे देश में कहर बनकर ढा रहा है इस समय स्वास्थ्य विभाग की लोगों को अत्यंत आवश्यकता है और इसी समय स्वास्थ्य कर्मी हड़ताल पर हैं। सर्व विदित है कि विभागीय कर्मचारी बहुत दिनों से अपनी मांग को सरकार के सामने रखते आ रहे हैं जिसमें शासन से दो मुख्य मांग सामने आ रही है। पहली की राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्यप्रदेश में कार्यरत समस्त संविदा कर्मियों को 5 जून 2018 की नीति अनुसार नियमित कर्मचारियों के वेतनमान का 90% वेतनमान फाईल वित्त विभाग से स्वीकृत कराकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से तत्काल आदेश प्रदान करना तथा दूसरा समस्त निष्कासित एवं सपोर्ट स्टाफ कर्मचारियों जिन्हें आउट सोर्सिंग के तहत बाहर किया गया है, उन्हें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्यप्रदेश में वापिसी की जावे।
स्वास्थ्य कर्मियों के इस समय इस तरह से हड़ताल करने ने सरकार को सकते में डाल दिया है जहां वर्तमान परिस्थितियां अधिकतर स्वास्थ्य विभाग पर केंद्रित है वहीं संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल वाकई सरकार की नाक में दम करने वाला है।
हां ये एक अलग बात है कि इस समय इस तरह का फैसला लेना संविदा स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा सही है या गलत कह पाना मुश्किल है पर इस वक्त जब मानवता पूरी तरह असहज महसूस कर रही है उस समय इस तरह का हड़ताल मानवता के विपरीत ही तो है। हड़ताल करना गलत नहीं है संविधान ने आपको अधिकार‌ दिया है पर देश की स्थिति को ध्यान में रखकर इस तरह के फैसले लेना हितकर होता। अब देखना यह है कि सरकार इस मामले में क्या खबर लेती है क्योंकि जितना जल्दी इस हड़ताल को समाप्त किया जा सके बेहतर होगा।

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