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अब तक उपेक्षित रहे धनौली में मिला पुरातत्वीय प्रतिमाओं का जखीरा।

- लक्ष्मी नारायण अवधिया/संजय गौतम। लोकविचार डिण्डोरी
- नासमझी के चलते पंचायत ने मनरेगा से करा दी खुदाई
- लगभग आधा एकड में मिले पुरातत्वीय अवशेष, प्रतिमाये
जिले में ऐसे कई पुरातात्विक महत्व के स्थल हैं जो संरक्षण के अभाव में जीर्ण शीर्ण हो रहे हैं कई दषकों पूर्व यहां से प्राचीन प्रतिमायें मिलने का सिलसिला शुरू हुआ है लेकिन संबंधित विभाग सिर्फ प्रतिमाओं को यहां से संग्रहालय तक ले जाने तक सीमित रहा है कभी मुडकर इन स्थानों के संबंध में कोई पडताल करने की जहमत नहीं उठाई गई है। कुकर्रामठ के अतिरिक्त जिले में ऐसे दर्जनों स्थल हैं जहां पुरावषेष मिले हैं लेकिन कभी यहां पर पुरातत्व विभाग ने अपनी रूचि नहीं दिखाई है जिस वजह से यहां की भूमि में दबे पुरातात्विक इतिहास नष्ट हो रहे हैं।
धनौली में बडी संख्या में मिले पुरावषेष
बजाग विकासखण्ड के धनौली गांव में लगभग आधा एकड इलाके में पुरावषेष का खजाना मिला है यहां पर विषालकाय मंदिर के अवषेष भी मिले हैं दरअसल यहां कोरोनाकाल में मनरेगा के तहत मजदूरों के लिये काम खोला गया था और मजदूर यहां पर काम कर रहे थे इस दौरान बडे हिस्से से प्राचीन नक्काषीदार पत्थर, प्रतिमायें मिली हैं जो काफी पुरानी है। यहां ऐसा प्रतीत होता है कि कोई विषाल भव्य हिन्दू मंदिर रहा होगा। ग्रामीणों ने यहां से निकले पत्थर व प्रतिमाओं को यहीं पर जमा दिया है।
विभाग ने की अनदेखी
जिले में मनरेगा के तहत शुरू हुये काम पर किसी अधिकारी की लगता है नजर ही नहीं पडी थी कोई भी यहां निरीक्षण के लिये नहीं आया तभी तो बदस्तूर यहां पर काम जारी रहा है तकनीकी अधिकारी सहित प्रषासनिक अधिकारियों ने यहां की सुध नहीं ली जिससे बडी संख्या में पुरातात्विक महत्व की प्रतिमाओं व आकृतियों को क्षति पहुंचने की संभावना नजर आ रही है कुल मिलाकर प्रषासन को आज दिनांक तक इस स्थल से निकले पुरावषेषों की जानकारी ही नहीं है।
पहले भी मिल चुकी है प्रतिमा
पुरातत्व विभाग व स्थानीय प्रषासन की अनदेखी का इससे बडा क्या उदाहरण होगा कि यहां पूर्व में भी भगवान विष्णु की प्रतिमा मिल चुकी है जिसे मण्डला ले जाया गया है साथ ही इस तरह की प्रतिमा अमरकण्टक में केषव नारायण के नाम से विख्यात होने की जानकारी है। गोंडी पब्लिक ट्रस्ट मण्डला की पुस्तक गोंड जाति का सामाजिक अध्ययन में लेखक रामभरोस अग्रवाल ने जहां 1988 में इस स्थल की जानकारी दी थी वहीं जिले के लेखक साहित्यकार डाॅ विजय चैरसिया ने भी अपनी पुस्तक में इस स्थल का उल्लेख करते हुये यहां प्राचीन अवषेषों के मिलने की जानकारी दी है।
उपेक्षा से नष्ट हो रहे पुरावषेष
डाॅ विजय चैरसिया की मानें तो धनौली में कल्चुरीकाल के मंदिर के अवषेष की संभावना जताई जा रही है उन्होंने बताया कि क्षेत्र में अमरकण्टक से लेकर मण्डला तक साथ ही डिण्डौरी जिले के कई स्थानों में कल्चुरी काल में मंदिर बनवाये गये जिसमें से सिर्फ आंषिक रूप से कुकर्रामठ के मंदिर को संरक्षित श्रेणी में रखा गया है शेष स्थल आज भी उपेक्षित हैं। इस उपेक्षा के चलते यहां पर पुराने मंदिर व अवषेषों को क्षति पहुंच रही है।
पुरातत्व विभाग को जिले में सक्रिय होने की आवष्यकता
जिले में ऐसे कई स्थान हैं जहां पर पुरावषेष हैं यहां पुराने मंदिर व प्रतिमायें मिल रही हैं लेकिन पुरातत्व विभाग इनके संरक्षण में रूचि नहीं ले रहा है अब आवष्यकता है कि जिले मे ंपुरातत्व विभाग की टीम सक्रिय हो और यहां के इतिहास को पुनर्जीवित कर पुरातन प्रतिमाओं और मंदिरों का संरक्षण करे साथ ही जिला मुख्यालय में एक पुरातत्व संग्रहालय की स्थापना हो जहां जिले की गौरवषाली, वैभवषाली इतिहास को समेटा जा सके। पूरे मामले पर जहां प्रषासनिक अधिकारी फोन रिसीव करने की जहमत नहीं उठा रहे वहीं जनप्रतिनिधि संरक्षण की दिषा में पहल की बात कह रहे हैं।
इनका कहना है
— धनौली में काफी पुराने अवषेष हैं जो संभवतः कल्चुरीकाल के हैं यहां eपर संरक्षण की आवष्यकता है कई अवषेष ध्वस्त हो चुके हैं यहां भगवान विष्णु की प्रतिमा मण्डला संग्रहालय में भी है यहां पर पहले पुराने सिक्के भी मिलते थे ऐसे स्थानों का संरक्षण अति आवष्यक है।
डाॅ विजय चैरसिया, लेखक साहित्यकार
–– यह हर्ष का विषय है कि जिले में प्राचीन अवषेष मिले हैं इनके संरक्षण के लिये जिला प्रषासन से चर्चा करूंगी साथ ही पुरातत्व विभाग से संपर्क स्थापित कर यहां का परीक्षण कराया जायेगा और इनके संरक्षण के प्रयास किये जायेंगे।
ज्योति प्रकाष धुर्वे, अध्यक्ष जिला पंचायत डिण्डौरी
–– इस संबंध में शासन को पत्र लिखकर अवगत कराया जायेगा और स्थल का परीक्षण कराया जायेगा जो भी पुरातात्विक महत्व की प्रतिमा अथवा अवषेष हैं उनका संरक्षण कराया जायेगा साथ ही यदि इस स्थान पर कोई विषाल मंदिर रहा होगा तो इस स्थल को ही विकसित कराया जायेगा जिले के अन्य स्थलों का भी परीक्षण करायेंगे।
फग्गन सिंह कुलस्ते, केन्द्रीय राज्यमंत्री व सांसद

