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गोंडवाना साम्राज्य की महारानी वीरांगना दुर्गावती के बलिदान दिवस पर जिला कांग्रेस ने अर्पित की श्रद्धांजलि..

गोंडवाना साम्राज्य की महारानी वीरांगना दुर्गावती के बलिदान दिवस पर जिला कांग्रेस ने अर्पित की श्रद्धांजलि..

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डिंडोरी- गोंडवाना साम्राज्य की महारानी दुर्गावती जी के बलिदान दिवस पर जिला कांग्रेस सहायता केंद्र मैं श्रद्धांजलि सभा का आयोजन कर कलेक्टर कार्यालय चौराहे पर स्थापित महारानी दुर्गावती जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया ।श्रद्धांजलि सभा के पूर्व वीरांगना महारानी दुर्गावती जी के तेलीय चित्र पर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष वीरेंद्र बिहारी शुक्ला, जिला उपाध्यक्ष आलोक शर्मा, जिला महामंत्री रजनीश राय, जिला महामंत्री बृजेंद्र दीक्षित, जिला महामंत्री अकील अहमद सिद्दीकी, मुकेश तिवारी जिला संगठन मंत्री, सुरेंद्र सरैया कांग्रेस सेवा दल, नमन जैन युवा कांग्रेस,गुलबसिया पूषाम महिला कांग्रेस, ने सूत की माला अर्पित की। श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष वीरेन्द्र बिहारी शुक्ला ने कहा कि महारानी दुर्गावती जी का जन्म दुर्गा अष्टमी के दिन होने के कारण इनका नाम दुर्गावती रखा गया था। नाम के अनुरूप अदम्य साहस, शौर्य और कुशल शासक के रूप में इन्होंने ख्याति प्राप्त की। महारानी दुर्गावती जी बचपन से ही अस्त्र शस्त्र विद्या में रुचि रखती थी, बचपन से ही घुड़सवारी तीरंदाजी तलवारबाजी जैसे युद्ध कला में महारत हासिल थी बंदूक और तीर से निशाना लगाने में उम्दा थी। गोंडवाना साम्राज्य की महारानी दुर्गावती जी के शासनकाल में गोंडवाना साम्राज्य आर्थिक सामाजिक रूप से बहुत मजबूत था मुगल शासक गोंडवाना साम्राज्य को मुगल साम्राज्य में विलय करना चाहते थे, लेकिन अदम्य साहस की महारानी दुर्गावती जी ने मुगलों के सामने अस्त्र शस्त्र उठा लिए और अनेकों बार महारानी के युद्ध कौशल के सामने मुगल सेनाओं को मुंह की खानी पड़ी ।सन 1564 में असफ खान ने गोंडवाना साम्राज्य पर हमला बोल दिया था, रानी दुर्गावती ने खुद सेना का मोर्चा संभाला हालांकि उनकी सेना छोटी थी, लेकिन दुर्गावती जी की युद्ध शैली ने मुगलों को भी चौंका दिया था महारानी दुर्गावती अपनी सेनाओं की छोटी-छोटी टुकड़िया बनाकर असफ खान पर हमला किया रानी की छुपी हुई सेना ने तीर बरसाना शुरू कर दिया जिससे असफ खान को अपने पैर पीछे खींचने पड़े । लगातार मुगल शासकों का सामना करते हुए रानी दुर्गावती जी के पास केवल 300 सैनिक बचे थे, रानी को भी आंख में तीर लगे थे, सैनिकों ने उन्हें युद्ध छोड़कर जाने के लिए कहा लेकिन योद्धा रानी ने ऐसा करने से मना कर दिया और आखरी सांस तक मुगलों से लड़ती रही। आज ही के दिन 24 जून 1564 में बरेला बरगी नरई नाला के समीप अंतिम युद्ध लड़ते हुए महारानी शहीद हो गई। आज अदम्य साहसी, योद्धा, पराक्रमी, कुशल शासक महारानी दुर्गावती जी के बलिदान दिवस पर हम सभी श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं। श्रद्धांजलि सभा में कार्यालय प्रभारी विजय दहिया पुष्पा महोबिया रम्मू सिंह, रोहनी कुमार, सहित कांग्रेस के नेता एवं पदाधिकारी उपस्थित थे।

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