जनजाति कल्याण केंद्र महाकौशल बरगांव द्वारा 100 गांवों में पंच परिवर्तन का संकल्पित लक्ष्य
संघ के शताब्दी वर्ष पर आयोजन


डिंडोरी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का सेवा प्रकल्प जनजाति कल्याण केंद्र महाकौशल विगत कई वर्षों से जनजाति बाहुल्य क्षेत्र में जनजाति समाज के सर्वांगीण विकास के लिए संकल्पित लक्ष्य से प्रयास कर रहा है| जनजाति कल्याण महाकौशल से जुड़े सेवा साधकों, मार्गदर्शक सेवा साधना के तपस्वी संतों के अथक – लक्षित परिश्रम – साधना के परिणाम दिखने लगे हैं| जनजाति समाज का सर्वांगीण विकास उनकी मूल संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक जीवनशैली को सुरक्षित रखते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और बुनियादी ढांचे (जल, जंगल, जमीन) का संतुलित विस्तार है। यह उनकी विशिष्ट पहचान को संरक्षित कर उन्हें मुख्यधारा की प्रगति से जोड़ने की एक समग्र प्रक्रिया है।शिक्षा एवं कौशल विकासआवासीय शिक्षा: एकलव्य मॉडल, आवासीय विद्यालय के जनजातीय क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना, स्किल ट्रेनिंग आधुनिक रोज़गार बाज़ार के अनुकूल युवाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण और पारंपरिक शिल्प को वैश्विक बाज़ार से जोड़ना। स्वास्थ्य एवं पोषण सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन: जनजातीय क्षेत्रों में इस आनुवंशिक बीमारी की जांच और प्रबंधन मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुदूर अंचल में चिकित्सा शिविर और पोषण कार्यक्रमों के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता आजीविका और आर्थिक सशक्तीकरण कृषि और वनोपज: जैविक खेती, उपजों का प्रसंस्करण सांस्कृतिक संरक्षण और जल, जंगल और जमीन की रक्षा का जागरण विरासत का सम्मान जनजातीय कला, भाषा, नृत्य और लोकगीतों को सहेजने के लिए सउत्सव का आयोजन जनजाति समुदायों का विकास केवल आर्थिक नहीं, बल्कि उनके सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश का सम्मान करते हुए सशक्तिकरण का लक्षित प्रयास किया जाता है|
जनजाति कल्याण केंद्र महाकौशल बरगांव की साधारण सभा बैठक दिनांक 14 जून को केंद्र के केशव सभागार में संपन्न हुई। बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह सेवा प्रमुख एवं केंद्र के मार्गदर्शक राजकुमार मटाले मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ।

बैठक में केंद्र की विभिन्न उपसमितियों ने विगत वर्ष के कार्यों का प्रस्तुतिकरण करते हुए आगामी वर्ष की कार्ययोजना पर चर्चा की। *”
संघ के शताब्दी वर्ष के 5 संकल्प: – पंच परिवर्तन- *सामाजिक समरसता*: भेदभाव मिटाकर एकता कुटुंब प्रबोधन परिवार को मजबूत करना
पर्यावरण प्रकृति की रक्षा स्वदेशी-अपने उत्पाद, अपनी भाषा को महत्- नागरिक कर्तव्य- देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी |इस दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन, पर्यावरण संरक्षण एवं ग्राम विकास से जुड़े सेवा कार्यों के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया।
अपने संबोधन में राजकुमार मटाले ने कहा कि जनजाति कल्याण केंद्र द्वारा संचालित सेवा कार्यों का विस्तार 100 ग्रामों तक किया जाए। श्री मटाले ने कहा कि सेवा कार्य ईश्वरीय कार्य है| उन्होंने सेवा को राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए समाज के अधिकाधिक लोगों को सेवा गतिविधियों से जुड़ने का आह्वान किया।

मुंबई के अभिनेता ब्रजकिशोर तिवारी ने भी केंद्र के सेवा कार्यों की सराहना करते हुए जनजातीय क्षेत्र के विकास में सहयोग का विश्वास दिलाया।
बैठक में अध्यक्ष मनोहर लाल साहू, सचिव डॉ. सुनीलकांत बाजपेयी सहित कार्यकारिणी एवं साधारण सभा के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के साथ हुआ।

