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जिले की पंचायतों में आँकड़ो की बाजीगरी के फेर में महज शोपीस बनकर रह गए स्वछता परिसर..निर्माण के बाद से दरवाज़ों में लटके ताले

डिण्डोरी—— आदिवासी बाहुल्य जिले में शासन की तमाम जनहितैषी कल्याणकारी योजनाएं धरातल में पानी माँगती नजर आती है लेकिन योजनाओं का क्रियान्वयन करने वाले जनपद से लेकर जिला पंचायत के सफेदपोश अफसरानों की सरकारी फाइलों में उक्त तमाम योजनाएं सरपट दौड़ रही है ।गौरतलब है कि स्वच्छता अभियान के मद्देनजर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में हाट बाजारो में आने वाले ग्रामीणों की को सुलभ शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पंचायतों में समुदायिक स्वच्छता परिसरों का निर्माण कार्य युद्ध इस्तर पर कराया गया था जिनके निर्माण कार्य को सनयः सनयः एक वर्ष हो रहे है लेकिन ये स्वच्छता परिसर आम लोगों के लिए कितने उपयोगी साबित हो रहे है यह बात किसी से छिपी नहीं है अपवाद स्वरूप ही गिनी चुनी ग्राम पंचायतों में इनका सफल संचालन किया जा रहा है बाकी ज्यादातर समुदायिक स्वच्छता परिसरों में निर्माण के बाद से ही लटके हुए ताले शोभा बढ़ाते नजर आते है धरातल जिम्मेदारों की निरंकुशता का जीता जागता उदाहरण बगैर किसी मसक्कत के देखने मिल जाता है शासन स्वच्छता अभियान को लेकर करोडों रुपये खर्च कर रहा है लेकिन जमीन में इसकी वास्तविकता खाली दिव्य स्वप्न ही प्रतीत होती है क्योंकि जिले के तमाम आला अधिकारी अपनी आँकड़ो की बादशाहत दिखाते हुए योजना को महज आँकड़ो में सरपट दौड़ा रहे है जिसकी बानगी जिले की पंचायतों में देखने मिल जाती है

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