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माँ नर्मदा की कृपा से आंखों की रोशनी लौटने पर परिक्रमा पर पैदल निकले नासिक के सलीम पठान


एक अनोखा नर्मदा परिक्रमावासी, जो समाज में नई मिसाल पेश कर रहा है। हम बात कर रहे हैं सलीम इस्माइल पठान की। महाराष्ट्र के नासिक में रहने वाले सलीम इस्माइल पठान पिछले 4 महीने से पैदल नर्मदा की परिक्रमा कर रहे हैं। सलीम एक दिन में करीब 40 किलोमीटर पैदल परिक्रमा करते हैं और शाम को नर्मदा की पूजा करने के बाद नमाज भी अदा करते हैं।सलीम पठान के नर्मदा भक्त और परिक्रमावासी बनने की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। सलीम बताते हैं कि जब वह पांचवी कक्षा में पढ़ता था तब आंधी आई। आंधी की धुल उसकी आंख में गई और उसकी आंख की रोशनी चली गई। तमाम कोशिशें की, खूब इलाज कराया, लेकिन आंखों की रोशनी नहीं आई। सलीम 14 साल तक अंधे रहे।

एक दिन उनके गांव में रहने वाले जनार्दन गिरी के शिष्य ने उनसे कहा कि तुम हमारे गुरूजी के पास चलो, फिर सलीम महामंडलेश्वर शांतिगिरी से मिले। वर्ष 2005 में शांतिगिरी महाराज मौन धारण किए हुए थे। सलीम ने बताया कि मैंने शांतिगिरी महाराज के सामने आंखों की रोशनी वापस लाने की बात रखी ।
महाराज के कहने पर सलीम ने 21 दिन तक उपवास रखा। शुद्ध शरीर करने के बाद वो महाराज सलीम को ओंकारेश्वर ले गए।

सलीम ने बताया कि शांतिगिरी महाराज ने कहा कि जो करेगी हमारी नर्मदा माई करेगी। इसके बाद शांतिगिरी महाराज सलीम को त्रंबकेश्वर फिर वापस ओंकारेश्वर ले आए। यहां सलीम से 8 दिनों तक नर्मदा माई के नाम का जप कराया। उसके बाद पूजा पाठ कराई।
