प्रदेश

स्मारक वर्सेस पुल पुलिया मामले में हाईकोर्ट ने दिया स्टे…स्मारक की माँग कर रहे जनपद सदस्यों ने हाईकोर्ट में लगाई थी याचिका…गुपचुप तरीके से सीईओ ने पास कर दिए थे प्रस्ताव

बजाग-जनपद पंचायत बजाग अंतर्गत सागरटोला चौराहा, पडरिया डोंगरी तिराहा और चांडा तिराहा में क्रमशः महाराज शंकर साह रघुनाथ साहू, बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर, और बैगा बैगिनकी मूर्ति स्थापित किए जाने के लिए 26/04/2023 सामान्य सभा की बैठक में 5वे वित्त की राशि से चार जनपद सदस्यों के द्वारा प्रस्तावित किया गया था जबकि जनपद पंचायत अध्यक्ष सहित नौ सदस्यों ने इन तीनों स्मारकों का विरोध करते हुए पुल पुलिया सहित अन्य निर्माण कार्यों का प्रस्ताव रखा। बैठक में सहमति ना बन पाने के चलते हंगामा हो गया और बैठक उच्चाधिकारियों से मार्गदर्शन मिलने तक के लिए स्थगित कर दी गई थी। 27 अप्रैल को दोनों पक्ष जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी नंदा भलावी के पास पहुंचे जिन्होंने मौखिक रूप से तत्कालीन जनपद मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुंशी लाल धुर्वे को मौखिक निर्देश दिए कि जनपद फंड की राशि जनपद सदस्यों में बराबर बांटी जाए। पुनः 28/04/2023 को बैठक बुलाई गई जिसमें मात्र चार सदस्यों के पहुंचने और अध्यक्ष सहित शेष 9 सदस्यों की अनुपस्थिति की वजह से कोरम पूरा ना होने के कारण सी ई ओ मुंशी लाल धुर्वे ने बैठक स्थगित कर दी।
असली विवाद उसके बाद शुरू हुआ दरअसल उसी दिन सी ई ओ ने बैठक निरस्त की और 28 अप्रैल को शाम चार बजे बगैर कोई सूचना निकाले और सुबह बैठक में आये चारों सदस्यों को सूचना दिए चारों की अनुपस्थिति में जनपद अध्यक्ष सहित 9 सदस्यों के साथ गुपचुप तरीके से पुल पुलिया सहित अन्य प्रस्ताव पास कर लिए। और कई बार पूछने के बाद और आवेदन देने के बावजूद कोई जानकारी चारों सदस्यों को दो माह तक नहीं दी। दो माह बाद कहीं से जानकारी मिलने पर जनपद सदस्य लोकेश पटेरिया, अमित बगदरिया पूनम साहू, शिवबती मरावी, अपने हिस्से के पैसे से स्मारकों के निर्माण को लेकर हाई कोर्ट पहुंचे और असंवैधानिक रूप से पारित प्रस्तावों पर स्टे की माँग की। उच्च न्यायालय ने भी सीईओ द्वारा एक बैठक को स्थगित कर उसी दिन दूसरी बैठक सभी सदस्यों को सूचना दिए बिना आहूत करने को धारा 44 का उल्लंघन माना और आवेदकों को निर्देश दिया कि धारा 85 के तहत कलेक्टर डिण्डोरी को एक आवेदन दें, साथ ही कलेक्टर डिण्डोरी को निर्देशित किया कि 15 दिन के अंदर इस मामले की सुनवाई करें। जिसके बाद आवेदकों ने हाई कोर्ट के निर्णय की कॉपी कलेक्टर डिण्डोरी को आवेदन सहित दी जिस पर 29 अगस्त की तारीख सुनवाई के लिए दी गई है जिसमें दोनों पक्षों को सूचना देकर बुलाया गया है। अब देखना है कि इस बहुचर्चित मामले में क्या होता है चारों सदस्य अपने हिस्से की राशी से स्मारकों का निर्माण करा पाते हैं या नहीं ये निर्णय अब कलेक्टर न्यायालय द्वारा किया जाएगा।

lokvichar

मीडिया भारत का महत्वपूर्ण अंग है,लोकविचार इस अंग को और मजबूत बनाने के लिए सच को लेकर काम करता है हमारा उद्देश्य आप तक सिर्फ सच को समय पर पहुचाना है हम निडर और निष्पक्ष होकर काम करने मे विश्वास करते है लोकविचार आमजन की समस्याओं को समाज के बीच रखता है-लोकविचार

Related Articles

Back to top button