पीएम ग्रामीण आवास योजना:-अधिकारियों की उदासीनता से जन हितैषी योजना को लगा पलीता

पात्र हितग्राहियों को नहीं मिल रहा आवास योजना का लाभ
अमरपुर/डिण्डौरी:- मोदी सरकार द्वारा जिस प्रकार से उन गरीबों के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत की गई थी।जिससे देश के प्रधानमंत्री की सोच थी कि जो गरीब बीते हुये कई वर्षों से अपने मासूम बच्चों के साथ कच्चे मकानों में अपनी जिंदगी काटने के लिए मजबूर होते हुए अपनी परिजनों की जिंदगी को खतरे में डालते हुए जीवन व्यतीत कर रहे हैं।उन गरीबों के जीवन को सुरक्षित करने की सोच के चलते सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत करते हुए गरीबों को पक्के आवास बनाकर देने का सपना सोच कर ही इस योजना की शुरुआत की गई थी मगर इस योजना के नाम पर जिस तरह साधन संपन्न लोग लाभ लेते हुए अपने पक्के मकानों को हवेलियों का रूप देने में जुटे हुए तो दूसरी ओर हकीकत गरीबों की जिंदगी आज भी कच्चे खस्ताहाल मकानों में कटती हुई दिखाई देने से नहीं चूक रही हैं, क्योंकि इस तरह जहां गरीब इस योजना का लाभ लेने से वंचित होने के साथ कच्चे मकानों में निवास करने के लिए मजबूर होते हुए देखे जा रहे हैं, तो साधन संपन्न लोगों की जरूरत पक्के मकान आवाज बनने से नहीं चूक पा रहे हैं, क्योंकि जिम्मेदार अधिकारियों की कागजी लीला खेल शहर से लेकर गांव में इस तरह देखने को मिल रहा हैं, कि जो पात्र हितग्राही हैं उनके आवास बनने का नंबर तो आ ही नहीं रहा हैं और जिनके पहले से ही पक्के मकान बने हुए हैं उनका जरूर इस योजना में नाम शामिल होकर धड़ाधड़ किस्ते जारी होती हुई चली जा रही हैं, इस बात से इनकार भी नहीं किया जा सकता हैं, कि इस योजना का लाभ गरीबों को मिला हैं, उन गरीबों के चेहरों पर खुशी दिखाई दे रही हैं, क्योंकि ग्राम पंचायतो की व्यवस्था गांव की चुनी हुई जिम्मेदारों के हाथ में थी तब हितग्राही का लाभ मिलती हुए देखा जा रहा था मगर प्रशासनिक व्यवस्था के अधिक होने से गरीबों के आवास निर्माण की व्यवस्थाएं हवा में लटकी हुई दिखाई देने लगी हैं, अनेक जगहों पर देखा जा रहा हैं, कि उन गरीबों को पक्के आवास उपलब्ध हो रहे हैं जो अपने जीवन में कभी पक्के मकानों में रहने की कल्पना तक नहीं कर पा रहे थे मगर कुछ जगहों पर इस योजना के संचालन में बरती जा रही लापरवाही कहीं जावे या फिर उदासीनता का परिणाम जिसके चलते इसके वास्तविक हकदार इस योजना से या तो वंचित देखे जा रहे हैं या फिर उनका सूचियों में समय पर नाम शामिल नहीं किए जाने के कारण अपनी व अपने परिजनों की जिंदगी को संकट में डालते हुए पुराने कच्चे आवास में रहने के लिए मजबूर होते हुए दिखाई दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गरीबों के लिए रामबाण साबित होने वाली इस योजना को ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक जगहों अधिकारियों व वहां के जनप्रतिनिधियों द्वारा जिस प्रकार से अपनी कमाई का जरिया का जरिया बनाते हुए लक्ष्य से भटका दिया गया हैं, जिसके चलते स्थिति इस प्रकार से दिखाई देने लगी हैं, कि पात्र हितग्राही तो इस योजना का लाभ लेने के लिए भटकती हुए देखे जा रहे हैं, मगर वह लोग जिनके पास पहले से ही पक्के आवास व बिल्डिंग बने हुए होने की स्थिति में अपात्र होने के बाद भी इस योजना की सूची में अपनी जुगाड़ू व्यवस्था के माध्यम से किसी भी प्रकार नाम शामिल करते हुए लाभ लेकर अपने पक्के आवास को हवेली के रूप देते हुए दिखाई पड़ रहे हैं, जबकि नियम के अनुसार तो यह बताया जाता है कि प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ हितग्राहियों को मिलना हैं, जिनके पास वर्षों पुराने कच्चे आवास हैं, उन्हें पक्का करने के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा राशि उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिन लोगों के पास पहले से ही पक्के आवास हैं, उन्हें इस योजना का पात्र हितग्राही नहीं माना जा सकता हैं, मगर अधिकारियों जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत के चलते सच्चाई इस प्रकार से देखी जा रही हैं, कि अनेक लोग अनेक पक्की बिल्डिंग धारी लोग अपने परिजनों का अलग-अलग कार्ड बनवाते हुए परिवार को विभाजित कर आवास योजना की सूची में नाम शामिल करते हुए गरीबों के लिए चलाई जा रही इस योजना पर अतिक्रमण करने से नहीं चूक पा रहे हैं। यदि प्रधानमंत्री आवासों की जांच होती हैं तो हकीकत सामने आ सकती हैं
