ग्यारवे दिन रविवार को भी जारी रही सहकारी समितियों के कर्मचारियों की हड़ताल

- शासन को सभी के परिवार की चिंता तो हमारे परिवार की क्यों नहीं- अंबिका पाण्डेय
डिण्डौरी। 3 सूत्रीय मांगो को लेकर सहकारी समितियों के द्वारा कलमबंद अनिष्चितकालीन हड़ताल रविवार को भी ग्यारवे दिन जारी रही अध्यक्ष अम्बिका पाण्डेय जी ने कहा कि साथियों शासन को पता हो या न हो पर हमंे विष्वास है वर्तमान में समिति द्वारा जितने भी कार्य किये जाते है – ऋण वितरण, वसूली, खाद, राषन वितरण, समर्थन मूल्य खरीदी पंजीयन, शासन की किसी भी योजना को जन जन तक पहुंचाने का कार्य उच्चाधिकारियों के एक आदेष पर हम तत्काल अंजाम तक पहंुचा देते है और ये हमारी कार्य कुषलता का प्रमाण है ये न शासन के बस की बात है न संबंधित विभागों की हम सहकारी बैंक, खाद्य विभाग, कृषि विभाग, सहकारिता विभाग, कुछ राजस्व विभाग के कार्य बहुत ही कम वेतन पर बंधुआ मजदूरों की तरह करते है। शासन संबंधित विभाग का कार्य उसी से कराए तब उसे पता चलेगा कि उसके ऊपर कितना आर्थिक बोझ आता है व कठिनाई होती है जब शासन को सभी के परिवार के चिंता है तो हमारे परिवार क्यों नही ंहम तो बस अपना अधिकार मांग रहे है।
ये रहे उपस्थित-
अंबिका प्रसाद पाण्डे अध्यक्ष, अमित दुबे प्रदेष प्रतिनिधि, नंदकुमार साहू उपाध्यक्ष, घसीटा लाल साहू कोषाध्यक्ष, शेषमणी ठाकुर सचिव, भूनेष्वर साहू सहसचिव, रामकुमार यादव, सुधीर ब्यौहार, टीसी बल्लारखेड़े, षिवकुमार रजक, राम सिंह चंदेल, देवन सिंह, उइके, गोविंद सिंह धुर्वे, जयप्रकाष, महेषयादव, शेषमणी ठाकुर, नारायण सिंह ठाकुर, भुवन प्रसाद नागेष, सुषील चंदेल, गोकल बर्मन, कत्तु चंदेल, इन्द्र कुमार सरैया, षिवदयाल गौतम, ब्रम्ह कुमार ठाकुर, महेन्द्र सिंह परस्ते, प्रदीप कुमार बनवासी, लालेन्द्र गवले, जागेष्वर गौतम, महेन्द्र कुमार बघेल, हरीष कुमार पेन्द्रों, शेर सिंह कुषराम, विनोद कुमार परमार, अषोक कुमार चंदेल, रत्नेष कछवाहा, संजय, श्री रजक जी, द्वारका प्रसाद गौतम 150 की संख्या में कर्मचारी उपस्थित थे।

