एजेंट बोले- हमारे पैसे डूबे, केस भी दर्ज हुआ। अब छिपते फिर रहे।
जिन एजेंटों के परिवार में शादी योग्य लड़के-लड़की हैं उनसे लोग रिस्ता नहीं बना रहे, 80% एजेंटों ने पहले निवेश किया
समनापुर- अन्य राज्य सरकार ने भले ही चिटफंड कंपनियों के एजेंटों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने का आदेश देकर उनकी मुश्किलें कम करने की कोशिश की है लेकिन मध्यप्रदेश सरकार ने ऐसा कुछ नहीं किया जिससे चिटफंड कंपनी के एजेंट परेशान हैं ,एवं उन लोगों से राहत नहीं मिल रही है जिन्होंने उनके कहने पर बड़ी रकम कंपनियों में निवेश कराई थी। कंपनियों के एजेंटों का ये हाल है कि वे अपने रिश्तेदारों तक की शादियों में नहीं जा पा रहे हैं। परिवार में कहीं शोक हो तो श्मशान घाट से ही वापस आना पड़ता है। गांवों के रास्तों पर चलना मुश्किल है। सबकी वजह एक ही है। लोगों का कहना है कि कंपनियों में जो रकम निवेश कराई है उसे वापस दिलाओ। डिंडौरी जिले के गांवों में रहने वाले ज्यादातर एजेंटों का घर से निकलना बंद है। या तो वे घर में बंद रहते हैं या सुबह सुबह ही गांव से निकल जाते हैं। एजेंटों का कहना है उनकी मुश्किलें खत्म नहीं हो रही। लोगों के पैसे जब तक नहीं मिलेंगे वे सामान्य जिंदगी नहीं जी सकेंगे। चिटफंड कंपनियों के एजेंटों ने बताया कि एजेंट बनने के पहले वे खुद कंपनी के ग्राहक बने थे। उन्होंने अपनी जमा पूंजी लगवायी। पहले छोटी पॉलिसी तो तुरंत फायदा हो गया। एक एजेंट ने बताया कि उन्हें एक स्कीम में बड़ा फायदा देखकर उन्होंने रकम घर भी नहीं लायी, बल्कि नई स्कीम में पूरे पैसे लगा दिए। इसी तरह हर एजेंट को शुरुआती दिनों में फायदा हुआ और उन्होंने बल्कि रिश्तेदारों को भी स्कीम बताकर उनसे भी पैसे निवेश करवा लिए। अब वे खुद कर्ज में डूबे हैं।
एजेंटों में शामिल गुलाब राजपूत और सुरेश कश्यप ने बताया कि उन्होंने गरिमा कंपनी में लोगों से निवेश करवाया। कंपनी भाग गई और लोगों की रकम डूब गई। पैसे डूबने के लिए लोग उन्हें ही जिम्मेदार ठहराते हैं। कोई रोज सुबह पैसे मांगने पहुंच जाता है तो कोई रास्ते में रोककर बुरा भला कहता है। लोगों के डर से वे घरों से बाहर नहीं निकलते। इसके बावजूद कई बार उन्हेें लोग घर से उठाकर बंधक बना लेते हैं। कंपनी में लगाई गई रकम वापस मांगते हैं। नहीं देने पर मारपीट भी करते हैं। ऐसा कई बार हो गया है।
समनापुर गांव के मुकेश ने बताया कि अभी हाल में भी उन्हें एक परिवार ने बातचीत के लिए बुलाया। किसी भी तरह का विवाद न हो इसलिए वे उनके घर चले गए। घर पहुंचते ही बाहर से दरवाजा बंद कर दिया गया और कहा कि जब तक कंपनी में लगे हजारों रुपये कब मिलेंगे नहीं बताओगे बाहर जाने नहीं देंगे। कई देर के मान मनौव्वल के बाद भी वे नहीं माने। घरवालों ने यह तक कह दिया कि रकम नहीं दी तो बेटियों को शादी तक तुम्हारे घर पर रखेंगे। शादी का खर्चा तुम्हें ही उठाना होगा।
ग्राम ऊफरी चौकी गोपालपुर थाना करजियां जिला डिन्डौरी निवासी रुपेश कुमार सारीवान ने बताया की मैने 2008 मे गरिमा ग्रुफ आफ कम्पनी में ज्वाईन किया था और जिन लोगो का मैने पैसा जमा कराया था उन सभी का मैने वापस करा दिया है मेरे द्वारा किसी भी निवेशक या ऐजेंट का कोई लेनदेन बाकी नहीं होने के बावजूद भी मेरे ऊपर कार्यवाही की जा रही है। जो भी निवेशक पुलिस थाने जाकर कम्पनी के नाम पर शिकायत करता है , पुलिस कम्पनी के उपर कार्यवाई न करते हुए हमारे ऊपर कार्यवाही किया जाता हैं जब की मेरे माध्यम से किसी के साथ धोखाधड़ी नहीं किया गया है। कार्यवाही होनी चाहिये तो कम्पनी के मालिक के ऊपर ऐजेंट तो अपने रोजगार के लिए काम कर रहे थे। रुपेश सारीवान ने बताया जिले के उच्चाधिकारियों के सामने अनेकों बार अपनी परेशानी से रूबरू कराया गया लेकिन अभी तक कोई राहत नहीं मिली है,हमारा जीना दूभर हो गया है।केवल डिडौरी जिला में ही नहीं बल्कि राज्यभर के चिटफंड एजेंटों का जीवन संकट में। जो एजेंट कुंवारे हैं उन्हें लड़कियां तक नहीं मिल रही हैं। लोगों के तानों की वजह से उनसे कोई भी परिवार रिश्ता नहीं रखना चाहता। 80 फीसदी एजेंटों ने पहले अपने घर की रकम कंपनियों में लगाई उसके बाद ही दूसरों को इसकी जानकारी दी।कई एजेंट ऐसे हैं जिन्होंने लाखों रुपये कंपनियों में जमा कराई। अब उनके रिश्तेदार उनके घरों को बिकवाने के लिए दबाव डाल रहे हैं। सरकार को एजेंटों के खिलाफ दर्ज मामलों की वापसी करानी चाहिए।
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