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अस्पताल प्रबंधन का अमानवीय रवैया-परिजनों को शव ढोने को होना पड़ा मजबूर…

लोकविचार शहपुरा
अप्रत्याशित तौर पर बस्तरा गांव में माँ बेटी की जल जाने से मौत की घटना से आहत परिजनों को उस वक्त गहरा आघात लगा जब मृतकों के शवो को पोस्टमार्टम के लिए ढोने को मजबूर होना पड़ा,दरअसल घटना के बाद मृतकों को पीएम के लिए शहपुरा लाया गया जहां अस्पताल से मरचुरी तक शवों को ले जाने के लिए परिजनों को स्ट्रेचर ढकेलना पड़ा, परिजनों के साथ अस्पताल प्रबंधन का रवैया गैर जिम्मेदाराना व अमानवीय है। परिजनों के दुख का वैसे भी ठिकाना नही है उल्टे प्रबंधन ने उनके दुखों पर मरहम लगाने की बजाय और अधिक पीड़ा दे रहा है।

दरअसल ग्राम बस्तरा में गत देर रात्रि कमरे में सो रही मां व 11 माह की बेटी की जलने से मौत हो गई। जानकारी में बताया गया है कि मां सरिता बाई अपनी 11 माह की बच्ची के साथ सो रही थी व घर के अन्य कमरों में सास-ससुर एवम देवर भी सो रहे थे। वही अज्ञात कारणों से देर रात करंट फैलने व आग लगने से महिला व बच्ची बुरी तरह जल गई। पता चलने पर ससुर व देवर द्वारा दरवाजा खुलवाने का प्रयास किया गया परंतु दरवाजे में भी करंट था दरवाजा किसी तरह तोड़कर दोनों को 108 की मदद से उपचार हेतु शहपुरा अस्पताल लाया गया। परन्तु इसके पहले ही मां और बेटी दोनों की मौत हो चुकी थी।
घटना के दौरान मृतक महिला का पिता पास स्थित ग्राम खेरभगदू रिस्तेदारी में गया था। फिलहाल शहपुरा पुलिस घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। मामले में बताया गया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बना हुआ था जिसमें दरवाजा लोहे का लगा हुआ था जिसमें सविता मरावी पति दुर्गा मरावी उम्र 24 अपनी 11 माह की बच्ची दिपिका के साथ सो रहीं थी तभी देर रात यह हादसा हो गया।
