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जंगली क्षेत्र में हाथियों के झुंड ने मचाया उत्पात,चौरादादर में गरीब का उजाड़ा आशियाना

अखलाक क़ुरैशी, गोरखपुर
गोरखपुर -करंजिया विकासखंड के अंतर्गत ग्रामपंचायत चौरादादर में बुधवार की देर रात छत्तीसगढ़ की सीमा से आएं तकरीबन छ: हाथियों के झुंड ने गांव के अंदर घुसकर जमकर उत्पात मचाया हैं बताया गया कि जंगली रास्ते से गांव की सीमा में प्रवेश करते हुए झुंड ने सबसे पहले महेंद्र सिंह पट्टा पिता पतिराम के कच्चे मकान को निशाना बनाते हुए पूरी तरह उजाड़ दिया एवं बुद्धराम पिता देवान बैगा दोनों निवासी चौरदादर के मकान को तहस नहस कर घर में रखें अनाज को खा गएं हैं ।राहत की बात यह हैं कि हाथियों के हमलें में मानव जीवन को हानि नहीं पहुंचाया है जबकि उस समय घर के अंदर सभी मौजूद थे घर वालों ने जैसे ही हाथियों की आवाज सुनी तो घर छोड़ दूर भग गएं थे गौरतलब हैं कि हाथियों के घरों में हमलें के बाद पीड़ित परिवार के सामने भरी बरसात में सर छुपाने का ठिकाना नहीं बचा हैं परिजन चाहकर भी तत्काल में व्यवस्था नहीं कर सकते ऐसी स्थिति में परिजन कुछ दिनों के लिए उचित ठौर ठिकाना की तलाश में दिनभर यहां वहां भटकते रहे अंततः ग्रामीणों की मदद से उन्हें गांव के अंदर घर दिलाया गया हैं जहां पीड़ित परिवार के लोग सिर छुपाएं हैं वहीं क्रमशः हाथियों के आगमन और उपद्रव की स्थिति ने विभाग सहित आमजन को गंभीर चिंता में डाल दिया हैं दरअसल यह जंगली जानवरों के हमलों का क्षेत्र नहीं था यदाकदा जानवर टकरा जाते थे लेकिन हमलावर नहीं होते थे कुल मिलाकर शांत तरीके से जीवन चल रहा था मगर जब से हाथियों ने उत्पात मचाना प्रारंभ किया है तब से उनके द्वारा हमलें के मामले बढ़ते जा रहें हैं को रोकना यह विभाग के लिए चुनौती साबित हो रहा हैं वहीं इनके आक्रमक होने से वनांचल क्षेत्रों में दहशत व्याप्त हैं आबादी से दूर घर बनाकर रहने वाले लोग भी हाथियों के आने के खबर से घर छोड़ कर बस्ती में जाकर शरण लें रहें हैं । वहीं अनुमान लगाया जा रहा हैं कि हाथियों को स्थायी ठहराव नहीं मिलने के कारण तथा भूख प्यास की व्याकुलता ने उन्हें हमलें करने पर मजबूर कर रहा हैं । बताया गया कि हाथियों ने चौरादादर में उपद्रव करने के बाद दिनभर खारीडीह पंचायत के गांव तरवरटोला में बने रहें मौके पर मौजूद वनविभाग का अमला उनकी समस्त गतिविधियों पर नजर रखें हैं। पीड़ित की परेशानी -चौरादादर में हाथियों द्वारा तबाह हुए आशियाना को भरी बरसात में व्यवस्थित कर पाना पीड़ित परिवार के लिए आसान नहीं है दरअसल उनकी आर्थिक ऐसी नहीं हैं कि तत्काल छाया तैयार कर लिया जाएं यह सोचकर महेंद्र काफी परेशान हैं उसकी मानें तो बरसात का मौसम चल रहा हैं वैसे भी नगद वाले सारे कामकाज बंद पड़े हैं जो जमापूंजी बचाकर रखें थे उसमें मात्र पेट पालने का भर इंतजाम कर सकते थे लेकिन हाथियों ने जिस तरह से घर के साथ अनाज को नुकसान पहुंचाया हैं उसके बाद यह जमापूंजी भी पेट पालने के लिए नाकाफी है आर्थिक स्थिति भी मजबूत नहीं कि कहीं से व्यवस्था हो जाएं । फिलहाल वो उम्मीद भरी नजर से जिला प्रशासन की ओर देख रहा हैं उसने बताया कि तत्काल में तो उसके पास कोई इंतजाम नहीं हो सकता यघपि अभी इसी मकान में रहकर काम चलाना पड़ेगा क्योंकि भरी बरसात में परिवार के साथ किसके पास जाकर दुखड़ा सुनाएंगे उसके अनुसार हाथियों के अचानक हमलें ने उसपर वज्रपात जैसा संकट ला दिया हैं वें नुकसान पहुंचाने में सिर्फ घर के तोड़फोड़ तक सीमित नहीं हैं बल्कि झुंड ने आपातकाल समय के लिए घर में सुरक्षित रखें अनाज धान एवं राई को खाकर जमीन में बिखरा दिया यह हमारे सामने भुखमरी की नौबत लाने जैसा हो गया हैं क्योंकि हमारी सारी आर्थिक व्यवस्थाएं कृषि पर आधारित हैं अलग से आमदनी का कोई जरिया नहीं हैं यदि फसलों का उत्पादन अच्छे से होकर दाना सही सलामत घर तक पहुंच गया तो सालभर के खाने के लिए अनाज की चिंता नहीं रहती पूरा साल सुकून से गुजर जाता हैं वरना आर्थिक तंगी के चलते बाहर मेहनत मजदूरी कर पेट पालना पड़ता हैं लेकिन यहां तो हाथियों ने हाथ से निवाला छीनकर पूरे परिवार के भविष्य को अंधकारमय कर दिया हैं । चिंतित हैं क्षेत्रवासी – गौरतलब हैं कि जब से हाथियों का दल हमलावर होकर लगातार आनाजाना कर रहा हैं तब से जंगल के नजदीक रहनें वाले एवं कृषक सहित मैदान में निवास करने वाले परिवारों के लोग अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हो गए हैं। वो बतातें हैं कि प्रारंभिक दौर में आमजन इनसे भयभीत नहीं थे परंतु बीते वर्ष से लेकर अभी तक की स्थिति में हाथियों का झुंड मानव जीवन के लिए खतरा बन रहा हैं यहीं कारण हैं कि वनांचल क्षेत्रों में हाथियों के आमद को लेकर भय का वातावरण हैं वहीं कृषि क्षेत्र से जुड़े किसान भी फसलों के नुकसान के बाद चिंतित नजर आ रहें हैं उनका चिंता करना जरूरी भी हैं क्योंकि पिछले समय देखने में आया हैं कि जब धान की फसल पककर तैयार थी उसी समय हाथियों ने फसलों को नुकसान पहुंचाया था गेहूं के फसल की सीजन में भी यहीं स्थिति बनी थी लिहाजा यह हाथियों का वास्तविक रहने का स्थान नहीं हैं बावजूद इसके लगातार आने जाने का क्रम बना हुआ हैं इसके अलावा जंगल किनारे आवास बनाकर रहने वाले लोग भी अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रहें हैं उनकी मानें तो जब से हाथियों ने हमलावर रवैया अपनाया हैं तभी से वें डरें डरें रहतें हैं ।
