प्रदेश

प्रमुख सचिव,कलेक्टर समेत अन्य जिम्मेदारों को एनजीटी में व्यक्तिगत उपस्थित होने का आदेश पारित

  • अधिवक्ता सम्यक् जैन,मनन अग्रवाल एवं धीरज तिवारी की याचिका पर सुनवाई के दौरान एनजीटी मुख्य पीठ ने पारित किया आदेश
  • नर्मदा में फैल रहे प्रदूषण एवं मिल रहे गंदे नालों को रोकने दर्ज कराई थी याचिका
  • आदेश का अनुपालन कराने मुख्य सचिव एवं महाधिवक्ता को दिए निर्देश

डिंडौरी। डिंडौरी में सीवरेज के दूषित जल, मल से प्रदूषित हो रही माँ नर्मदा के संरक्षण को लेकर शासन प्रशासन उदासीन हैं, मामले को लेकर युवा अधिवक्ता सम्यक जैन और मनन अग्रवाल ने एनजीटी में मामला दर्ज कर ठोस उपाय करने की मांग किया था, 05 अप्रैल को मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य पीठ ने जिम्मेदारों के लापरवाह रवैये को लेकर नाराजगी जताई है। नर्मदा नदी में अशोधित सीवेज की रिहाई को रोकने में विफल रहने पर, प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन विभाग और अन्य को एनजीटी की मुख्य पीठ ने 09/08/2023 को व्यक्तिगत रूप से प्राधिकरण में पेश होने का आदेश पारित किया है। एनजीटी के समक्ष दायर याचिका में नर्मदा नदी में अनुपचारित सीवेज को रोकने में विफल रहने के लिए मध्य प्रदेश सरकार और स्थानीय अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

एनजीटी द्वारा पारित आदेश दिनांक 10.01.23 के अनुपालन में एमपीपीसीबी द्वारा उत्तर दायर किया गया है,लेकिन कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार प्रतिवादियों को नोटिस विधिवत रूप से तामील किया गया है किंतु उत्तरदाता प्रमुख सचिव नगरीय विकास विभाग, कलेक्टर डिंडौरी,सीएमओ डिंडौरी,मुख्य अभियंता केंद्रीय जल आयोग भोपाल, की तरफ से कोई उपस्थित नहीं हुआ। मुख्य पीठ ने नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने कहा कि राज्य और उसके तंत्र को प्रासंगिक विवरण के साथ अपने जवाब/प्रतिक्रिया प्रस्तुत करना सुनिश्चित करना है और न्यायाधिकरण के समक्ष विधिवत अधिकृत प्रतिनिधियों/अधिवक्ता के माध्यम से अपना प्रतिनिधित्व करना और अपना जवाब/प्रतिक्रिया दाखिल करना है, लेकिन जिम्मेदारों के द्वारा गंभीर लापरवाही बरती जा रही है जिससे पर्यावरण प्रभावित हो रहा है, पीठ ने यह भी कहा कि ट्रिब्यूनल द्वारा जारी किए गए नोटिसों के अनुपालन के लिए उचित निर्देश जारी करने के लिए मामले को मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश सरकार एवं महाधिवक्ता के संज्ञान में लाया जाए।

प्रकरण के तथ्यों एवं परिस्थितियों के दृष्टिगत प्राधिकरण ने प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश नगरीय विकास विभाग, मध्य प्रदेश शासन, उपाध्यक्ष, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, भोपाल, मुख्य अभियंता, केंद्रीय जल आयोग भोपाल एवं कलेक्टर डिंडौरी को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से ट्रिब्यूनल के समक्ष उपस्थित होने एवं पक्ष रखने के आदेश पारित किया गया है । अधिवक्ता मनन अग्रवाल एवं सम्यक् जैन ने स्वयं की पैरवी ।

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