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सप्लयारों ने जनपद पंचायत के सीईओ गणेश पांडे के विरुद्ध खोला मोर्चा…एडवांस कमीशन के बगैर भुगतान न करने का आरोप,एसडीएम से हुई शिकायत

काशी अग्रवाल शहपुरा। अभी कुछ दिन पहले एक कथित पोस्ट पर भाजपा कांग्रेस पर हमलावर हो गई थी और प्रदेश भर में कथित पोस्ट पर शिकायतें दर्ज कराई गई थी पोस्ट में बिना कमीशन के काम नहीं होने संबंधी आरोप थे लेकिन शहपुरा जनपद पंचायत के सप्लायरों ने तो खुले तौर पर कमीशन लेने के आरोप लगा सीईओ गणेश पाण्डेय के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है, चुनावी साल में भाजपा पार्टी पर नित नए आरोपों की कड़ी में यह ताजा आरोप सरदर्द साबित हो सकता है। शहपुरा के सप्लायरों ने कलेक्टर के नाम एसडीएम शहपुरा को सौपे ज्ञापन में उल्लेख किया है कि हम समस्त सप्लायरों के द्वारा ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना के अन्तर्गत निर्माण कार्य हेतु ग्राम पंचायतों के माँग अनुसार सप्लायर द्वारा सामग्री दी जाती है जिसका भुगतान 4 (चार) माह में शासन द्वारा भुगतान हेतु राशि दिया जाता है। जिसमें 6 प्रतिशत की एडवान्स राशि (कमिशन) लिया जाता है जो कि
मुख्यकार्यपालन अधिकारी द्वारा मनरेगा कार्यक्रम अधिकारी राम मिलन रावत से भुगतान के एवज में सप्लायर पर दबाव पूर्वक छह प्रतिशत की राशि एडवांस में लेकर भुगतान किया जाता है। कमीशन की राशि न देने पर सप्लायर का भुगतान नहीं किया जाता है।
आरोप लगाया गया है कि पुराना भुगतान 2022 – 2023 पर पहले करना था जिसमें कमीशन एडवांस में लेकर इनके द्वारा 2023-2024 का भुगतान किया गया है जबकि पुराना भुगतान अभी भी शेष है।बोलने पर इसके द्वारा बोला जाता है कि हम ऐसा बीजेपी के कुछ नेता एवं जिला मुख्यकार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत को भी देना पडता है, एवं इस बात को किसी से नहीं करना नहीं तो तुम्हारा दुकान बंद करवा दूंगा। बिना पैसा जनपद के कोई काम नहीं होता है।
इसके पहले जनपद पंचायत मेंहदवानी में सीईओ गणेश पाण्डे पूर्व में पदस्थ थे और इसी तरह यहा पर भी इनके द्वारा अन्याय सप्लायर एवं सरपंचों के साथ किया जाता था। जिसका विरोध सरपंच संघ के द्वारा किया गया था. इसके बाद भी इनकी नवीन पदस्थापना जनपद स्वायत शहपुरा किया गया जिससे यह है कि सीईओ के ऊपर अधिकारी व नेता का हाथ है। जिससे आदिवासी क्षेत्र में आने के बाद सप्लायर एवं सरपंचों का शोषण जवाबदार अधिकारी होने के बाद भी अपने व्यक्ति से करवाया जाता है।
पत्र में उल्लेख है की ग्राम पंचायत के पास मात्र एक ही अधिकार था, सामग्री भुगतान हेतु मटेरियल का वेज लिस्ट फीड करना लेकिन इनके द्वारा बिना शासन के आदेशों के ग्राम पंचायतों के अधिकारों का हनन करते हुए उक्त अधिकारियों के द्वारा स्वयं बिल फीड कर वेजलिस्ट जनरेट करने लगे। जिसका समस्त सप्लायरों एवं समस्त सरपंच संघ इसका पुरजोर विरोध करते हुए सात दिवस के अन्दरअधिकारी को हटाये जाने का अल्टीमेटम दिया अन्यथा मजबूरन आन्दोलन करने की चेतावनी दी है।

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