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17 सालों से यात्री बसों में बुकिंग एजेंट का काम कर जीवनयापन करने को मजबूर सरोज सरकारी दावों की पोल खुलने के बाद महिला को सरकारी मदद एवं सम्मानित करने की बात कर रहे हैं अधिकार

एमपी के डिंडौरी में महिला सशक्तिकरण अभियान के दावों की खुली पोल

पीएम आवास के अलावा नहीं मिली कोई सरकारी मदद

आत्मनिर्भर भारत व महिला सशक्तिकरण की जीती जागती मिसाल है सरोज

  • lokvichar 7jan2021

बिछिया- एक तरफ सरकारें महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए तमाम अभियान चला रही है,महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकारी व राजनैतिक मंचों से खूब ढिंढोरा भी पीटा जाता है वहीं दूसरी तरफ मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी जिले के शाहपुरा तहसील से अंतर्गत बिछिया में एक महिला पिछले 17 वर्षों से यात्री बसों में बुकिंग एजेंट (कंडेक्टर) का काम करने को मजबूर है। महिला सशक्तिकरण अभियान के तहत महिलाओं को किस कदर सशक्त किया जा रहा है जिसकी बानगी इन तस्वीरों को देखकर बड़ी आसानी से लगाया जा सकता है। सरोज राय बताती हैं की जब उनकी उम्र महज 2 वर्ष की रही होगी तब उनकी मां की मौत हो गई थी,16 साल की उम्र में ही उनके पिता ने शादी करा दी लेकिन पति शराबी निकल गया और शराबी पति के हरकतों से तंग आकर उसने शादी के कुछ ही दिनों बाद पति को छोड़कर मायके आ गई। सरोज ने पहले बिछिया (डिंडोरी) बस स्टेंड में अंडे की दुकान खोली थी जिसमे वह कामयाब नहीं हुई फिर उसने यात्री बसों में बुकिंग एजेंट बनने का कठिन फैसला लिया ओर डिंडोरी जिले के bichiya से निवास होते हुए जबलपुर तक जाने लगी जिसे वो बखूबी निभा रही हैं। सरोज अपने काम में दक्ष है और वह दिनभर में कभी तीन तो कभी चार सौ रूपये कमा लेती है जिससे वह अपना और अपने परिवार का भरण पोषण करती है। हैरत की बात तो यह है महिलाओं के हितों व कल्याण की बड़ी बड़ी बातें करने वाले नेता व अफसरों ने इस महिला की सुध तक नहीं ली है। सरोज उन तमाम महिलाओं के लिए मिसाल है जो कई वजहों से परेशान होकर आत्महत्या जैसे घातक कदम उठा लेती हैं,सरोज की कहानी न सिर्फ महिला सशक्तिकरण की जीती जागती मिसाल है बल्कि देश के पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा चलाये जा रहे आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी चरितार्थ करती है। सरकारी दावों की पोल खुलने के बाद जिले के जिम्मेदार अधिकारी सरोज को सरकारी मदद व सम्मानित करने की बात करते हुए नजर आ रहे हैं।

इनका कहना है

हमने सरोज के बारे में काफी सुना है बहुत ही साहसी महिला है कई वर्षों से यह एजेंट का काम कर रही है बिना किसी डर के महिलाओं के लिए मिशाल भी हैं हम जल्द ही सरोज का सम्मान करेंगे ओर सरकारी योजना का लाभ दिलाएंगे।
श्याम सिंगोरे ,जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी डिंडोरी

आज के समय में लोग बेरोजगारी का बहाना बनाकर घरों में बैठे रहते हैं उस पर यदि कोई महिला अपने पैरों पर खड़े होते हुए पुरुष बाहुल्य कार्य को स्वीकार करते हुए बस कंडक्टर का काम करती है तो वास्तव में साहसिक कार्य है. सरोज दीदी निश्चित रूप से अन्य महिलाओं के लिये उदाहरण बन सकती है.
धर्मेंद्र सिंह ठाकुर हिंदू सेवा परिषद प्रदेश महासचिव

सरोज दीदी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर टक्कर देते हुए महिला शक्ति की मिसाल पेश कर रहीं हैं. इस तरह की महिलाओं को प्रोत्साहन मिलना चाहिये. जिससे प्रेरित होकर अन्य महिलायें भी अपनी राह खुद तैयार करें. आगामी गणतन्त्र दिवस पर कल्चुरी युवा सेना के द्वारा सरोज दीदी को सम्मानित किया जाएगा।। रोहित प्रशांत चौकसे जिला अध्यक्ष कल्चुरी युवा सेना जिला मंडला

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