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विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष-एक ओर विकास के नाम पर पर्यावरण को नुकसान,दूसरी ओर ग्रामीणों की जागरूकता से वनों का संरक्षण

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बजाग से अमित साहू की रिपोर्ट

हमारा जिला डिंडोरी पर्यावरण की दृष्टि से बहुत संपन्न है, पर लगता है कि जैसे इसे किसी की नजर लगी है यहां विकास के नाम पर हजारों वृक्ष वैध अवैध रूप से काटे जा रहे हैं काटने की बात करें तो वन परिक्षेत्र समनापुर के अंतर्गत ग्राम किकरझर में वनों की कटाई अवैध रूप से महेश साहू के द्वारा की जा रहा है यह जानकारी क्षेत्रीय ग्रामीणों ने दी, बीट गार्ड प्रहलाद बनवासी से जानकारी ली गई प्रहलाद बनवासी ने पहले बताया कि यह जंगल मेरे प्रभार में है और बाद में बताया वनों कि कटाई के संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं है फिर बताया कि गांव के ग्रामीण अपने निस्तार के लिए पेड़ों को लेकर जाते हैं। साथ ही ग्रामीणों का आरोप है फॉरेस्ट गार्ड के मिलीभगत से लोग महीनों से अवैध कटाई कर सरई की लकड़ी घर में ला रहे हैं जिसकी शिकायत रेंजर और किकरझर वीट के अधिकारियों से की गई है लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई और लगातार कटाई जारी है अगर देखें तो फॉरेस्ट ऑफिस के पीछे कुछ दूर में ही कटाई की जाती है और वहीं से ढोया भी जाता है लेकिन अधिकारियों द्वारा अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है।
वन परिक्षेत्र करंजिया अंतर्गत जनपद मुख्यालय बजाग से झनकी जोड़ने के लिए 10 किलोमीटर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अंतर्गत सड़क का निर्माण कार्य किया जा रहा है जिसमें जंगल भी कांटा जा रहा है।पर्यावरण की दृष्टि से हमारे क्षेत्र में बहुत अच्छी स्थिति थी, पर अब लगातार हावी होता डेवलपमेंट पेड़ों को काल के गाल में समाता जा रहा है। पेड़ों के लगातार कटने से पर्यावरण को खतरा बढ़ता जा रहा है। प्रशासन विकास के नाम पर लगातार पेड़ों को काट-काट कर सड़क निर्माण कार्य करा रही है। जिससे आवागमन का साधन तो बन रहा है पर पर्यावरण संरक्षण के नाम पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। जनपद मुख्यालय बजाग से झनकी को जोड़ने वाली सड़क पर लगभग 55 छायादार वृक्षों को काटा जा चुका है तथा और घने छायादार वृक्षों को काटने का कार्य चल रहा है। सरकार के निर्देश से इस जंगल में सड़क निर्माण के नाम पर लगातार वृक्ष तो कांटे ही जा रहे हैं परंतु इसका भरपूर फायदा आसपास के लोग और वनविभाग उठा रहा है जिसमें सैकड़ों पेड़ों को कटाई अवैध तरीके से हो रही है।इस तरह से अधिकांश पेड़ों को काट कर लगातार जंगल को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। सैकड़ों पेड़ों की बलि पहले ही प्रशासन कर चुका है तथा सैकड़ों पेड़ आस पास के वासिंदो के द्वारा लगातार काटा गया।

पर्यावरण संरक्षण के लिए ग्रामीणों का सराहनीय प्रयास

पर्यावरण को लेकर अब ग्रामीण भी जागरूक हो चले हैं और ग्रामीणों ने स्थानीय तौर पर कड़े नियम बना इसे बचाने का भी काम कर रहे हैं ऐसा ही मामला तहसील मुख्यालय से एक किमी की दूरी पर शहडोल- रायपुर राजमार्ग पर पड़रिया डोंगरी ग्राम पंचायत में एक किलोमीटर के क्षेत्र पर एक शानदार वृक्षारोपण कार्य आज से 15 साल पहले किया गया था जिसकी सुंदरता देखते ही बनती है। शानदार 10 हजार पेड़ लगाए गए और आज उस मेहनत का फल देखने को मिलता है। उस समय तत्कालीन ग्राम वन समिति के अध्यक्ष भूषण जैतवार, सचिव मानिक लाल मरावी, और वन परिक्षेत्र अधिकारी तेज भान सिंह की मेहनत आज भी हवा के प्रवाह में बह रही है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस वृक्षारोपण को बचाने के लिए ग्राम वासियों का भरपूर सहयोग मिल रहा है जिसमें ग्राम विकास समिति का भरपूर सहयोग है यदि कोई असमाजिक तत्वों द्वारा इस जंगल को नुक्सान पहुंचाया जाता है तो 5000रू का जुर्माना लगाया जाता है। जिसको ध्यान में रखकर बहुत से लोग पेड़ों को नुक्सान पहुंचाने की सोचते भी नहीं है। लोगों की जागरूकता हमें आक्सीजन सिलेंडर को कंधे में रखने से निजात दिला सकता है लेकिन यदि हम इस संबंध में उदासीन रहे हो कोविड महामारी के दौरान सिलेंडरों को लेकर आक्सीजन के लिए दौड़ते लोगों को देखा है वहीं हमारे जीवन का हिस्सा बन जाएगा। क्षेत्रीय नागरिकों की भूमिका और जागरूकता हमारे क्षेत्र ज़िला और देश को पर्यावरण के प्रति जागरूक करता है।

अब चेतना जरूरी है

सवाल यह है कि पूरे देश में इस तरह बनाए जा रहे सड़क, कारखाने, रेल पटरी, सुरंग और विस्तार में काटे जा रहे छायादार वृक्षों की कटाई से हो रही है यह विकास हमारे भविष्य और स्वास्थ्य की समस्या के साथ साथ बीमारियों को भी जन्म दे रहा है। प्रशासन द्वारा विकास के नाम पर लगातार हो रहे पर्यावरण के नुक़सान पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में लोगों के लिए पर्यावरण को बचाने बहुत समस्या बढ़ जाएगी।

हमारी टीम में लोगों की टीम अभूतपूर्व सहयोग और समर्थन के साथ 10000 से अधिक पेड़ों को लगाने और सुरक्षित करने में अत्याधिक मेहनत किए जिसका सीधा परिणाम हमारे सामने है।
मानिक लाल मरावी, तत्कालीन ग्राम वन समिति सचिव

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