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आठ माह से बिना डॉक्टर के चल रहा सरकारी अस्पताल, वार्डबॉय और ड्रेसर के भरोसे मरीज…

मांग के बाद नहीं हुई डाॅ॑क्टर की पूर्ति क्षेत्रवासियों में रोष

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अख़लाक़ कुरेशी

गोरखपुर- प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर निरंतर चिंता कर रहीं हैं सरकार का प्रयास हैं कि हर नागरिक को स्वास्थ्य सुविधा मिलें इसके लिए सरकार प्रति वर्ष बजट में बढ़ोत्तरी कर रहीं हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधा की धरातल स्थिति और कुछ हैं जबकि सरकार चाहती हैं कि हर नागरिक को सरकारी अस्पताल में डॉक्टर की मौजूदगी में अच्छा इलाज मिलें खासकर गरीब तबके के लोग जो अभाव के कारण निजी अस्पतालों में अपना इलाज कराने में सक्षम नहीं होते इन्हें बीमारी के उपचार के लिए यहां वहां न भटके लेकिन गोरखपुर के सरकारी अस्पताल की कहानी इससे विपरीत हैं दरअसल यहां के अस्पताल में आठ माह से डाॅक्टर नहीं हैं और मरीजों को बेहतर इलाज नहीं मिल रहा ऐसे में यहां आने वाले मरीज अपने उपचार के लिए वार्ड बॉय ड्रेसर और नर्स के भरोसे हैं जबकि इस स्वास्थ्य केंद्र के भरोसे दस पंचायत के नागरिक स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए निर्भर हैं जानकारी के मुताबिक इसके पहले यहां जिस डॉक्टर की नियुक्ति थी वो अब बड़ी डिग्री हासिल करने में लगें हैं उसके बाद से आज तक केंद्र में किसी डॉक्टर की नियुक्ति नहीं हुई हैं जबकि स्थानीय लोगों ने डॉक्टर की पदस्थापना के लिए क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि से लेकर विधायक और सांसद से मांग कर चुके हैं मगर अभी तक इस संबंध में किसी जनप्रतिनिधि ने पहल नहीं किया और नतीजा शून्य हैं ऐसे में कस्बावासियों ने जिला प्रशासन से मांग की हैं कि कस्बा के सरकारी अस्पताल में एक प्रशिक्षित डॉक्टर की पदस्थापना शीघ्र किया जाएं ।
पुरानी समस्या हैं
कस्बावासियों की मानें तो यहां डाॅक्टर आते जरुर हैं लेकिन कोई टिकता नहीं कोई डिग्री हासिल करने चला जाता हैं तो किसी को गांव रास नहीं आता इसी के चलते स्थायी डाॅक्टर की कमी लंबे से बनी हुई हैं और इसका सीधा नुकसान मरीजों को उठाना पड़ता हैं अपनी छोटी से छोटी बीमारी के उपचार के लिए उन्हें यहां वहां भटकना पड़ रहा हैं स्थानीय लोगों ने कोरोनाकाल में भी डाॅक्टर की अनुपस्थिति पर बड़ा सवाल खड़ा कर किया हैं वे कह रहें हैं कि इस महामारी के दौर में भी एक अदद डाॅक्टर का इंतजाम न होना ये हमारी नाकामी का सबूत हैं हालांकि आम आदमी की तकलीफों से किसी को कोई सरोकार नहीं फिर भी कस्बा के सरकारी अस्पताल में डॉक्टर की पदस्थापना बहुत जरूरी हैं क्योंकि गरीब और ग्रामीण क्षेत्र का मरीज निजी अस्पताल की महंगी इलाज कराने में सक्षम नहीं होता खासकर ऐसे लोगों को अच्छा और सस्ता मिलना चाहिए वैसे भी अच्छा और सस्ता इलाज पाना हर नागरिक का अधिकार हैं

लैब टेक्नीशियन का पद खाली –

अस्पताल प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार लैब टेक्नीशियन का पद भी लंबे समय से खाली पड़ा हैं पूर्व में एक लैब टेक्नीशियन यहां बैठता था लेकिन उसका तबादला कर दिया गया जब से यह पद भी रिक्त हैं ऐसे में यहां आने वाले मरीजों की खून, पेशाब, शुगर, आदि की बीमारी की जांच की सुविधा बंद हैं । यदि कोई मरीज खून आदि की जांच कराना चाहता हैं तो उसे डिंडौरी गाड़ासरई जाकर जांच कराना पड़ रहा हैं ऐसे में समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा हैं ऊपर से बिना जांच के उपचार भी नहीं किया जाता सबसे ज्यादा फजीहत ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को तब हो जाती हैं जब उन्हें मालूम पड़ता हैं कि यहां न तो डाॅक्टर हैं और न ही किसी प्रकार के जांच की सुविधा ऐसे में वे बेचारे बिना इलाज कराएं ही वापस अपने घरों को लौट जाते हैं और लगातार बीमारियों के चपेट में रहकर परेशान होते रहते हैं ।

इनका कहना है
डाॅक्टर की कमी तो हैं विखं में मात्र दो ही डॉक्टर हैं दोनों ब्लाक मुख्यालय के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ड्यूटी देते हैं हालांकि गोरखपुर में डाक्टर की कमी के बारे में मेरे द्वारा उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया हैं ।
बीएमओ सूरज सिंह उद्दे करंजिया

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