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पेयजल के लिए रतजगा कर रहें सुनपुरी के ग्रामीण, जलसंकट ने धारण किया विकराल रूप…

पेयजल के लिए रतजगा कर रहें सुनपुरी के ग्रामीण, जलसंकट ने धारण किया विकराल रूप…

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गोरखपुर-करंजिया विखं के अंतर्गत ग्रापं पाटनगढ़ के गांव सुनपुरी में 700 की जनसंख्या और लगभग 120 परिवार के रहवासी ग्रामीण इन दिनों पेयजल के लिए रतजगा कर रहें हैं दरअसल गांव के अंदर एक ही हैंडपंप हैं जिस के भरोसे पूरा गांव में हैं इसके अलावा खेतों में बनें कुएं तो हैं लेकिन इनमें पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं हैं सभी कुएं लगभग सूखने के कगार पर हैं जिसके कारण यहां पानी की समस्या ने विकराल रूप ले लिया हैं लोग अंधेरे में उबड़-खाबड़ वाले रास्ते से चलकर लंबे इंतजार करतें हुए इन्हीं जलस्रोतों से अपनी प्यास बुझाने विवश हैं जबकि गांव के अंदर पानी की किल्लत हर समय रहतीं हैं लेकिन गर्मी के मौसम में यह किल्लत रतजगा करने को मजबूर कर देती हैं ग्रामीणों का कहना हैं कि वर्षों से पेयजल की समस्या से जूझ रहें हैं स्थानीय जनप्रतिनिधि से लेकर पंचायत के जवाबदार सरपंच सचिव जनपद सदस्य विधायक सांसद सभी से वें इस समस्या के समाधान के लिए गुहार लगा चुके हैं लेकिन निराकरण करने के लिए किसी ने पहल नहीं किया हैं इस कारण उनके अंदर आक्रोश हैं अंततः बड़ी उम्मीद के साथ स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से अनुरोध करतें हुए पेयजल की समस्या का समाधान करने के लिए आग्रह किया हैं ।

आजादी के बाद भी नहीं हुआ सुधार

– सुनपुरी गांव के नागरिक जगत मरावी, धीरज बाई उर्वेती चैनू सिंह श्याम तारेंद्र जैतवार, आदि ने बताया कि सरकार बदली सांसद विधायक बदलें सरपंच बदला गया अधिकारी कर्मचारी बदलें गए लेकिन हमारे गांव में पेयजल की समस्या आज भी वैसी हैं जैसे आजादी के समय थी आजादी के सात दशक के बाद भी हम लोगों को वैसी मूलभूत सुविधा नहीं मिली जिसके हम हकदार हैं हमारे गांव की पेयजल की समस्या से पंचायत के प्रतिनिधि भलीभांति परिचित हैं लेकिन किसी ने हमारी खैर खबर नहीं ली हालांकि अभी हाल ही के दिनों में पंचायत के तरफ से पानी के लिए गांव के अंदर ही बोर कराया गया लेकिन ये बोर से पानी निकला नहीं निकला आगे की क्या व्यवस्था हैं इस संबंध में हमारे पास स्पष्ट जानकारी नहीं हैं हम इसे अपनी विडंबना ही मानते हैं कि जो मानव जाति की सबसे ज्यादा आवश्यकता की चीज हैं उससे हम मोहताज हैं सारी सुविधाओं के मौजूद रहने के बाद भी हमें पेयजल के लिए रात दिन जद्दोजहद करना पड़ता हैं हमारे लिए तो यह समस्या किसी त्रासदी से कम नहीं हैं आज भी हम मूलभूत सुविधाओं के अभाव में नारकीय जीवन जीने पे मजबूर हैं पानी की कमी के चलते इंसानों के साथ साथ मूक पशुओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ता हैं इन्हें गांव से तीन किमी दूर सिवनी नदी में ले जातें हैं तब इनकी प्यास बूझती हैं । पेयजल के लिए रतजगा करना पड़ता हैं -सुनपुरी गांव में व्याप्त जलसंकट के चलते स्थानीय लोगों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा हैं लोग पेयजल के लिए सारी रात जाग रहें हैं दरअसल यहां एक हैंडपंप और गांव के दोनों ओर ढलान में तीन कुएं हैं लेकिन हैंडपंप जलापूर्ति करने के पहले ही हांफ जाता हैं तो दो कुएं सूखने के कगार पर हैं जबकि एक कुएं का पानी पेयजल के योग्य नहीं हैं इसलिए लोगों को रात भर जागकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता हैं इन परिस्थितियों में सबसे ज्यादा दिक्कत महिलाओं को हो रहीं हैं इन्हें सुबह उठते ही पेयजल के इंतजाम के लिए भागना पड़ रहा हैं साथ ही बच्चों को भी पानी भरने की जिम्मेदारी सौंपी गई हैं इसके चलते बच्चों और महिलाओं की दिनचर्या प्रभावित हो रही हैं स्थानीय नागरिक बोधन सिंह मरावी ने बताया कि वो पेयजल के लिए अपने परिवार के साथ अंधेरी रात में 12 बजे कुआं जाकर पानी लाता हैं यदि वो इस समय में कुआं तक नहीं पहुंचा तो उसका नंबर नहीं लगता क्योंकि अब कुएं भी सूखने के कगार पर दिन में तो लंबे इंतजार के बाद इन कुओं से पानी निकलता हैं लोग रात और दिन बराबर डेरा डाले रहते हैं तब जाके पीने के पानी का इंतजाम होता हैं इस दौरान तक पहुंच गए तो ठीक वरना दिन में भी पानी नहीं मिलता बावजूद इसके ग्रामीणों को जलसंकट से निजात दिलाने के लिए शासन प्रशासन के द्वारा कोई ठोस कदम अब तक नहीं उठाए गए हैं। जबकि यही हालात रहे तो आने वाले दिनों में यहां पानी को लेकर हाहाकार की स्थिति बन सकती हैं। क्योंकि प्राकृतिक स्रोत सूखने से जलसंकट की स्थिति निर्मित हो रही हैं।अपनी बारी के लिए रात में लगाना पड़ता हैं नंबर -गांव की महिला सावित्री बाई धुर्वे ने बताया की वो सुबह चार बजे हैंडपंप के पास पेयजल के लिए नंबर लगाई थी दिन में पांच बज रहें हैं अब जाके उसका नंबर आया हैं इसके बाद भी उसे भरपूर पानी नहीं मिलेगा क्योंकि गांव के अंदर लोगों की प्यास बुझाने के लिए एक ही हैंडपंप हैं लगातार चलतें रहने से इसका जलस्तर नीचे सरक जाता हैं फिर घंटों इंतजार करने के बाद पानी ऊपर चढ़ता हैं तब बमुश्किल दो गुंडी पानी नसीब होता हैं उस पर भी यदि रात में यहां नंबर न लगाया गया तो दिन में पानी मिलना मुश्किल हैं क्योंकि पूरे गांव के लोग रात में ही अपनी बारी के लिए खाली बर्तनों को हैंडपंप के करीब रख जातें हैं बारी बारी से ही पानी भरने दिया जाता हैं दरअसल पेयजल के दूसरे साधन नहीं होने से यह हालात बनें हैं जबकि यहां बारहमासी पेयजल संकट की स्थिति बनी रहतीं हैं लेकिन गर्मी के दिनों में यह संकट विकराल रूप ले लेती हैं बावजूद इसके इस समस्या के निदान के लिए अब तक कोई ठोस उपाय नहीं किया गया जिसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा हैं गर्मी के मौसम में तो हालात और भी भयावह हो जातें हैं लोगों को गला तर करने के लिए पानी नहीं मिल पाता लोग बूंद बूंद पानी के लिए भटकते हैं जगत मरावी ने बताया कि ऊबड़ खाबड़ पथरीले रास्ते से पानी के लिए ढलान उतरकर आना जाना किसी युद्ध लड़ने से कम नहीं हैं पथरीले रास्ते से खाली बर्तन लेकर ढलान उतर तो जातें हैं लेकिन पानी से भरे बर्तन लेकर उतनी ही चढ़ाई चढ़ने में हमेशा फिसलने का डर लगा रहता हैं इस दौरान यदि थोड़ा भी चूके तो गंभीर परिणाम भुगतना पड़ सकता हैं मगर क्या करें इसके अलावा पेयजल का कोई दूसरा विकल्प भी नहीं हैं इसलिए मजबूरन इसी रास्ते से आना जाना करना पड़ता हैं ।मेहमान आने के नाम से डरते हैं -हीरा सिंह श्याम ने बताया कि पानी की किल्लत के कारण हमें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं दो तीन दिन में एक बार नहाते हैं निस्तार तक के लिए भरपूर पानी नहीं मिलता इस बीच यदि कोई मेहमान आने की बात करता हैं तो हम डर जातें हैं उन्हें साफतौर पर मना कर दिया जाता हैं कि अभी पेयजल संकट गहराया हैं इसलिए कुछ दिन रुक जाएं गांववासियों की मानें तो किसी भी धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम के आयोजन के प्रारंभ करने से पहले टैंकर वाले से बात करने के बाद ही कार्यक्रम की तारीख तय करना पड़ता हैं तभी कार्यक्रम करना संभव होता हैं इसके लिए टैंकर वाले को एक निश्चित राशि देकर पानी खरीदना पड़ता हैं तब जाके कार्यक्रम के लिए पानी उपलब्ध हो पाता हैं ।

इनका कहना है -सुनपुरी गांव में जलसंकट तो हैं अभी हाल ही पंचायत के द्वारा पानी की समस्या को दूर करने के लिए गांव के अंदर दो बोर कराया गया था लेकिन जलस्तर नीचे चलें जाने के कारण बोर सफल नहीं हुआ हालांकि फिर भी मेरे द्वारा प्रयास किया जा रहा हैं कि शीघ्र ही ट्यूबवेल जैसी व्यवस्था करकें ग्रामीणों की पेयजल उपलब्ध कराकर इस समस्या से निजात दिलाया जाएगा । वर्षा कुशराम सरपंच पाटनगढ़

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