संतान की लंबी उम्र की कामना के लिए महिलाओं ने किया हलषष्ठी व्रत
डिंडौरी/शहपुरा
डिंडौरी जिले की महिलाओं ने शनिवार को हलषष्ठी व्रत धारण और पूजन किया। सभी व्रतधारी माताओं ने संतान की दीर्घायु की कामना लेकर पूजा-आराधना की। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में प्राचीन परंपरा के अनुसार व्रत पूरा किया। कथा में बताया गया कि हलषष्ठी का व्रत पुत्र की लंबी आयु के लिए किया जाता है। महाभारत युद्ध के दौरान अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के पुत्र को अश्वत्थामा ने गर्भ में ही मार दिया था। इसके बाद भगवान कृष्ण ने उत्तरा को हलषष्ठी व्रत विधान बताया। व्रत काे विधानपूर्वक पूरा करने के बाद उत्तरा का पुत्र जी उठा। तभी से हर साल पुत्रवती महिलाएं अपनी संतान की रक्षा के लिए यह व्रत करती आ रही हैं। व्रत स्थल पर आटे का चौक बनाकर चारों ओर छरबेरी, पलाश और कांस की डालिया लगाकर पूजा की जाती है। साथ ही भगवान को लाई, महुआ, चना और गेहूं का मिश्रण (भुजनिया) का भोग लगाकर प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। जिस जमीन पर हल नहीं चलता, ऐसी जगह उगे धान (समा) का सेवन कर व्रत का पारण किया जाता है।
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