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जिला पंचायत में कांग्रेस का सूखा समाप्त.. जिला पंचायत अध्यक्ष,उपाध्यक्ष पर कांग्रेस का कब्जा टाॅस से हुआ फैसला रूदेश अध्यक्ष तो अंजू बनी उपाध्यक्ष

डिण्डौरी। शुक्रवार को संपन्न हुये जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में कांग्रेस ने कब्जा कर लिया है और रूदेश परस्ते अध्यक्ष व अंजू ब्यौहार उपाध्यक्ष निर्वाचित हुई हैं सुबह 11 बजे से प्रारंभ हुई चुनावी प्रक्रिया के बाद सभी दस सदस्य जिला पंचायत परिसर में प्रवेश हुये और नामांकन की प्रक्रिया प्रारंभ हुई अध्यक्ष के नामांकन प्रक्रिया में ज्योति प्रकाश धुर्वे और रूदेश परस्ते ने अपना नामांकन दाखिल किया और वोटिंग प्रक्रिया संपन्न हुई परिणाम में दोनों अभ्यर्थियों को बराबर पांच पांच मत प्राप्त हुये जिसके बाद टाॅस से अध्यक्ष का फेसला हुआ और परिणाम रूदेश परस्ते के पक्ष में आये जिसके बाद बाहर खडे कांग्रेसियों में खुशी की लहर दौड गई और पटाखे फोडकर सभी ने खुशी का इजहार करने लगे।
उपाध्यक्ष पद पर आंकडा अलग रहा
इसके बाद उपाध्यक्ष पद के लिये निर्वाचन की प्रक्रिया प्रारंभ हुई जहां पर अंजू ब्यौहार व प्रीतम के बीच मुकाबला रहा और यहां पर अध्यक्ष के विपरीत छह मत अंजू ब्यौहार को मिले यानि अध्यक्ष पद पर सदस्यों का मत अलग रहा और उपाध्यक्ष पद पर उनका मत अलग रहा। अंजू के उपाध्यक्ष पद पर निर्वाचन की सूचना के बाद कांग्रेस पार्टी ने दोनांे पदों पर कब्जा जमा लिया और बाहर सभी समर्थक व पदाधिकारी कांग्रेस के जीत का जश्न मनाने लगे। अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के बाहर निकलते ही विशाल रैली निकाली गई।
17 साल बाद हुई कांग्रेस की वापिसी
जिला पंचायत में 17 सालों बाद कांग्रेस की वापिसी हो पाई है 2005 के बाद से यहां पर कभी कांग्रेस का अध्यक्ष नहीं रहा है जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में कांग्रेस को तीन सीटें ही मिल पाई थी और भाजपा को छह, एक सीट गोंडवाना के खाते में गई थी लेकिन अपनी कुशल रणनीति के चलते कांग्रेस ने अपनी संख्या अध्यक्ष पद के लिये पांच कर ली साथ ही उपाध्यक्ष पद पर भी अंजू ब्यौहार को छह मत दिलाने में कामयाब रही है।
वीरेंद्र बिहारी शुक्ला और रमेश राजपाल की मेहनत रंग लाई –
रूदेश परस्ते और अंजू ब्यौहार के इस तरह की अप्रत्याशित जीत में यह कहा जाना चाहिए इन सब में जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष वीरेंद्र बिहारी शुक्ला और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश राजपाल का महत्वपूर्ण योगदान रहा है वे प्रारंभ से ही रूदेश परस्ते को लेकर आस्वस्त थे और लगातार अपने जमीनी स्तर के नेताओं को साथ लेकर चलने के कारण ही कांग्रेस को आज इतने सालों के अंतराल के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष मिला है। लगता है इस तरह के परिणाम की कहीं ना कहीं कांग्रेस को पहले से भनक थी क्योंकि कांग्रेस के कद्दावर नेता और विधायक ओमकार मरकाम और भूपेंद्र सिंह मरावी पहले से मौजूद रहे, वहीं पूरे जिले से आए कांग्रेस के नेता अपनी पार्टी की जीत पर एक दूसरे को बधाई देते तथा नाचते गाते नजर आए।
अंतर्कलह व गुटबाजी की शिकार हुई भाजपा
हालांकि जनपद पंचायतों में मुंह की खाने के बाद भी भाजपा सक्रिय नहीं रही और कमजोर संगठन, संगठन में अंतर्कलह व गुटबाजी के चलते भाजपा के तीन सदस्य कांग्रेस ने अपने पक्ष में कर लिये हालांकि पूरे चुनाव में भाजपा संगठन नदारत रही और किसी भी स्तर पर सक्रिय नहीं दिखाई दी अलबत्ता कुछ पदाधिकारी लगातार जिला पंचायत चुनाव में सक्रिय दिखाई दिये जिसका परिणाम यह रहा कि भाजपा के हाथ से यह सीट चली गई।
जीत के बाद कांग्रेस में दिखी एकता
पूरे त्रि स्तरीय चुनाव में बिखरी रही कांग्रेस आखिर जीत के बाद एकजुट हो गई जिला पंचायत चुनाव सदस्य के चुनाव में कांग्रेस विधायक ओमकार मरकाम और रूदेश परस्ते के बीच जुबानी जंग जारी रही दोनों ने एक दूसरे के विरोध में मैदान में रहे और रूदेश ने गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के समर्थन से विजयश्री हासिल कर ली इसके बाद जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर काबिज होते ही पूरी कांग्रेस एकजुट हो गई

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