आखिर कब सुधरेगी शिक्षा व्यवस्था,
विभागीय अधिकारियों की संलिप्तता के चलते प्राचार्य बेखौफ
जन शिक्षा केन्द्र गोपालपुर अंतर्गत बैगा बाहुल्य पंडरीपानी हायर सेकंडरी स्कूल का मामला
विगत दिवस बच्चों को नहीं मिला मध्यान्ह भोजन

बजाग। बैगा बाहुल्य क्षेत्र में शिक्षा विभाग सिर्फ खानापूर्ति तक सीमित है जबकि विभागीय अधिकारियों की संलिप्तता के चलते प्राचार्य और स्कूली शिक्षकों की मनमानी चरम सीमा में है। जनपद क्षेत्र करंजिया अंतर्गत जन शिक्षा केन्द्र गोपालपुर के हाई स्कूल पंडरीपानी में शिक्षकों की मनमानी के चलते खुलेआम रूप से बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। यहां पदस्थ शिक्षक और प्राचार्य समय पर उपस्थित नहीं हो रहे हैं। विद्यालय में पदस्थ शिक्षक सिर्फ हस्ताक्षर करने और तनख्वाह लेना ही सिर्फ कार्य बचा है। जिससे बच्चों के निकट भविष्य में होने वाले परीक्षा की तैयारी नहीं हो पा रही है। छात्रों के अनुसार अभी तक स्कूल का कोर्स नहीं हो रहा है जबकि विभागीय अधिकारी और शिक्षकों की मनमानी की सजा कक्षा नवमी से बारहवीं के छात्र छात्राओं को उठाना पड़ रहा है। आपको बता दें कि संस्था प्रमुख स्वयं विद्यालय में समय पर उपस्थित नहीं हो रहे हैं जिसका फायदा उपस्थित शिक्षक उठा रहे हैं तथा जिसका खामियाजा स्कूली बच्चों को उठाना पड़ रहा है।
मध्यान्ह भोजन भी नहीं हो रहा उपलब्ध –
संस्था प्रमुख ओर स्व सहायता समूह की लापरवाही के चलते लगातार मध्यान्ह भोजन योजनान्तर्गत प्राथमिक और माध्यमिक शाला के बच्चों को मिलने मध्यान्ह भोजन उपलब्ध नहीं हो रहा है जिससे बच्चों को भूखे रहकर स्कूल में रहना पड़ रहा है। विभागीय अमला की मनमानी के चलते बच्चों को भूखा रहना पड रहा है, जिससे बच्चों के हित में बनाई गई योजना का भुगतान सिर्फ खानापूर्ति कर सरकार के खजाने में सेंध लगाने की मनमानी कोशिश की जा रही है।
स्कूल छोड़ घूम रहे बच्चे किसी घटना का जिम्मेदार कौन –
स्कूल के लंच की छुट्टी पर बच्चे स्कूल परिसर छोड़ रोड़ पर घूमने तथा कुआं झांकते हुए देखे जा सकते हैं यदि कोई घटना इस दौरान घटती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा, जबकि संस्था प्रमुख स्वयं विद्यालय की जबावदारी को लेकर मनमानी कर रहे हैं जिसका खामियाजा स्कूली बच्चों और अविभावकों को भोगना पड़ सकता है।
प्राथमिक शाला के रैगुलर शिक्षक भी नदारद –
प्राथमिक शाला पंडरीपानी के शिक्षक लापरवाही के चलते लगातार विद्यालय नहीं आते हैं जिसका जीता जागता उदाहरण विगत दिवस उनकी अनुपस्थिति से मिला। विद्यालय के शिक्षक जिम्मेदारी और अनुशासन का पालन नहीं किया जा रहा है।
