डिंडोरी जिले की सीमा देवरीकला पहुंचे संत का श्रद्धालुओं ने किया भव्य स्वागत,27 माह से निरंतर हैं निराहार
निराहार रहकर कर रहे 3200 किमी की नर्मदा परिक्रमा
संत समर्थ गुरु (दादा गुरु) का उद्देश्य नर्मदा व पर्यावरण संरक्षण

काशी अग्रवाल
शहपुरा। कहते है भूखे पेट भजन नहीं होते, लेकिन एक संत ऐसे भी है जो न सिर्फ भजन, सत्संग बल्कि निराहार रहकर मां नर्मदा की 3200 किमी की परिक्रमा भी कर रहे है। संत समर्थ गुरु (दादा गुरु) अपनी नर्मदा परिक्रमा यात्रा के दौरान जबलपुर जिले के पहाड़ी खेड़ा ग्राम से होते हुए मंडला जिले के निवास तहसील मुख्यालय से होते हुए बिझोली,आमगांव, बिसौरा,मानिकपुर,से होते हुए डिंडोरी जिले की सीमा बिछिया के देवरी कला मां नर्मदा मंदिर देर शाम पहुंचे यहां बिछिया के समाजसेवी संजय राय,गणेश तिवारी, हेम कुमार कच्छवाहा,राजेंद्र साहू, चम्मू लाल झरिया,संतोष नामदेव,सुशील गुप्ता ,सुनील राय आदि अन्य श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर दादा जी का भव्य स्वागत किया यहां श्रृद्धालुओं द्वारा उनका ढोल बाजों आतिशबाजी के साथ भव्य स्वागत किया।
बता दे की महराज जी 08 नवंबर 2022 दिन मंगलवार से कार्तिक पूर्णिमा माह में मां नर्मदा तट ओंकारेश्वर से यह यात्रा शुरू की हैं। इस दौरान जगह-जगह विभिन्न स्थानों पर दादा गुरु का भक्तगणों ने जोरदार स्वागत किया जा रहा है। वहीं विभिन्न राजनीतिक, समाजसेवी और स्वयं सेवी संस्थाओं ने मंच लगाकर पुष्प वर्षा कर दादा गुरुदेव का स्वागत किया।
जानकारी अनुसार शनिवार की शाम को दादा गुरुदेव ने डिंडोरी जिले की सीमा बिछिया के देवरी नर्मदा मंदिर में प्रवेश किया। इसके बाद उन्होंने अपने पूरे संत मंडली के साथ बिछिया के नर्मदा मंदिर परिसर में रात्रि विश्राम किया। यहां उन्होंने अपने सत्संग प्रवचनों से भक्तों को अलंकृत किया। बताया गया रविवार की सुबह मां नर्मदा के पूजन अर्चन के बाद अपनी आगे की यात्रा अमरकंटक के लिए शुरू करेंगे।
निराहार रहकर नर्मदा संरक्षण के लिए अनशन :
बताया गया कि 13 वर्षों से संचालित नर्मदा मिशन के संस्थापक संत समर्थ गुरु पिछले कई सालों से नर्मदा एवं पर्यावरण संरक्षण जिसमें धर्म, धरा, धेनु शामिल है के लिए निराहार रहकर अनशन कर रहे है। उनकी इस महाव्रत में उनके सैकड़ों भक्त भी शामिल हो रहे है। उनकी इस नर्मदा परिक्रमा यात्रा को 27 माह से अधिक समय हो गया है, जो लगातार जारी है।
माँ नर्मदा को जीवंत इकाई का दर्जा दिलाना :
महाराज जी माँ नर्मदा को जीवंत इकाई का दर्जा दिलाने के संकल्प के साथ परिक्रमा कर रहे है। महाराज जी ने बताया की मां नर्मदा नदी की परिक्रमा का उद्देश्य माँ नर्मदा और सहायक नदियों के शुद्धिकरण, संरक्षण, संवर्धन के लिए जन भागीदारी सुनिश्चित करना। माँ नर्मदा के हरित जल संग्रहण क्षेत्र में निर्माण अतिक्रमण, खनन को पूर्णत: प्रतिबंधित कर संरक्षित करना एक मात्र उद्देश्य है।
