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बटई नाला में मिट्टी मिली रेत से चल रहा निर्माण कार्य, ग्रामीणों की मांग फिर से बनें पुल


गोरखपुर से अख़लाक़ कुरेशी की रिपोर्ट
-करंजिया विखं के अंतर्गत ग्रापं सैलवार के पास से बहने वाली बटई नाला में इन दिनों नये सड़क निर्माण के साथ जगह जगह पुल का निर्माण कार्य ठेकेदार के द्वारा कराया जा रहा हैं । लेकिन निर्माण कार्य को निर्धारित मापदंड के तहत नहीं कराया जा रहा हैं जिससे क्षेत्र वासी में रोष हैं ग्रामीण बताते हैं कि यहां पुल के निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया जबकि उनके द्वारा कंपनी के लोगों से कहा गया था कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का खास ख्याल रखा जाएं फिर भी यहां कार्य की देखभाल करने वाले ठेकेदार के कर्मचारी ने ध्यान नहीं दिया ग्रामीणों ने घटिया सामग्री के उपयोग करने पर आपत्ति भी जताई लेकिन उनकी बातों को अनसुना कर मौके पर मौजूद कर्मचारी निडर होकर अपने काम में लगा रहा ग्रामीण बताते हैं कि कार्य के प्रारंभ से ही यहीं स्थिति हैं काम की स्थिति को देखने अभी तक संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर नहीं आएं और न ही क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने देखना चाहा इसी बात का फायदा उठाकर ठेकेदार पुल के निर्माण में मनमानी बरत रहा हैं अमानक स्तर की सामग्री और मिट्टी मिली रेत का खुलेआम उपयोग करतें हुए निर्माण करवा रहा हैं इसी की बानगी हैं कि निर्माणाधीन पुल में अभी से सीमेंट झड़ रहीं हैं जबकि सही ढंग से पानी की तराई नहीं किए जाने से कुछ स्थानों पर दरार दिखने लगा हैं । तथा मौके पर पड़ी हुई रेत खुद ब खुद घटिया निर्माण कार्य की दास्तां को बयां कर रही हैं । अंधेरे में बांधा तार –
ग्रामीणों की मानें तो जब इस पुल में लेंटर ढाला जाना था तब रात के अंधेरे में मोबाइल के टार्च की रौशनी से छड़ों को बांधा गया हैं जब यहां पर मौजूद ठेकेदार के प्रतिनिधि से स्थानीय लोगों ने जानना चाहा कि दिन की बजाएं रात के अंधेरे में काम क्यूं करवाया जा रहा हैं तो उनका बेपरवाह जवाब था कि बरसात लगने के पहले काम खत्म करना हैं इसलिए रात में काम करवा रहें जबकि नियमतह रात के अंधेरे में किसी भी तरह का निर्माण कार्य नहीं किया जाता लेकिन अंधेर नगरी चौपट राजा में सब संभव हैं की तर्ज पर बरसात की आड़ में नियम विरुद्ध काम किया गया हैं स्थानीय लोगों ने कहना हैं कि कि जब ठेकेदार को बरसात के लगने के पहले काम समाप्त करने की इतनी ही चिंता थी तो विलंब कहां हुआ बारिश के पूर्व ही काम समाप्त कर देना था ।
गुणवत्ता का नहीं रखा जा रहा ध्यान-
ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि पुल के निर्माण कार्य की समीक्षा करने कोई नहीं आता यहीं कारण हैं कि जो मौके पर ठेकेदार के कर्मचारी काम करवा रहें हैं उन्हें मनमानी करने का वरदान मिल गया हैं यह एक पुल की बात नहीं हैं गोरखपुर के पास सिवनी संगम से लेकर गोपालपुर तक सड़क निर्माण के दौरान जितने भी नये पुल का निर्माण किया गया हैं सभी में अमानक स्तर की सामग्री का इस्तेमाल किया गया हैं ग्रामीणों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि यहां पुल के निर्माण में घटिया सामग्री और खराब रेत का जमकर उपयोग किया गया हैं जिसकी बानगी अभी से सीमेंट झड़ने के साथ नजर आने लगी हैं यहां न तो पानी की तराई का ध्यान रखा गया और न ही मानक स्तर की सामग्री का उपयोग किया गया जबकि उच्च क्वालिटी की सामग्री के साथ निर्माण कार्य को करना था लेकिन ठेकेदार ने ऐसा नहीं किया कोरोना कर्फ्यू काल का फायदा उठाकर मनमानी ढंग से निर्माण कार्य को पूर्ण करने में लगा है क्षेत्रीय लोगों ने बताया कि आजादी के बाद पहली बार इतनी बड़ी लागत से सड़क और पुलों का निर्माण किया जा रहा हैं यानि सात दशक के बाद यह सौगात क्षेत्रवासियो को मिली तब तो निर्माण कार्य मजबूती से होना चाहिए क्योंकि ऐसे बड़े कामों की स्वीकृत कराना आसान नहीं बावजूद इसके निर्माण कार्य में गुणवत्ता का ख्याल न रखा जाना पूर्णतया गलत हैं । आखिरकार ग्रामीणों ने एक स्वर में अपनी आवाज बुलंद करते हुए जिला प्रशासन से अनुरोध किया हैं कि यहां कमजोर पुल के बदले में मजबूत पुल का निर्माण कराया जाएं क्योंकि इस पुल के ऊपर से अधिक भार लेकर बड़े बड़े वाहनों का आवागमन दिन रात लगा रहता हैं । इसलिए किसी अप्रिय स्थिति के बनने से पूर्व ही पुल का फिर से निर्माण कार्य करवाया जाएं ताकि लोग निडर होकर पुल के ऊपर से गुजर सकें ।

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